अखिलेश के रायबरेली दांव से भड़की कांग्रेस, अजय राय बोले- हम भी सैफई और मैनपुरी जा सकते हैं
Lucknow News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राहुल गांधी के गढ़ रायबरेली से अपनी PDA रथ यात्रा का आगाज किया, जिसे राज्य में सपा का चुनावी बिगुल माना जा रहा है।
अखिलेश के इस दांव पर यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का भी कड़ा रुख सामने आया है। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव के समय कोई भी कहीं भी जाने के लिए आजाद है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव रायबरेली या अमेठी आ सकते हैं, तो कांग्रेस भी सैफई, मैनपुरी और कन्नौज में उतरने से पीछे नहीं हटेगी। इससे पहले भी सपा सांसद इकरा हसन और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयानों से ‘INDIA’ गठबंधन की दरारें उजागर हुई थीं, जिस पर अब सत्ताधारी एनडीए (NDA) भी चुटकी ले रहा है।
यूपी में सपा ही मुख्य विपक्षी धुरी
अखिलेश यादव का कांग्रेस के इस पारंपरिक और सबसे सुरक्षित इलाके से यात्रा शुरू करना एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, सपा इसके जरिए संदेश देना चाहती है कि यूपी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से सीधा मुकाबला करने वाली ताकत केवल वही है, चाहे बात कांग्रेस के क्षेत्र की ही क्यों न हो। 2024 का लोकसभा चुनाव साथ लड़ने के बावजूद अब दोनों दलों में राज्य के भीतर खुद को बड़ा भाई साबित करने की होड़ मची है।
बैकफुट पर रहने के मूड में नहीं कांग्रेस
दूसरी तरफ, अजय राय के बयानों से साफ है कि लोकसभा चुनाव में मिली 6 सीटों के बाद कांग्रेस अब सपा के सामने झुकने को तैयार नहीं है। सपा के मजबूत गढ़ों (कन्नौज, मैनपुरी, सैफई) में जाने की बात कहकर कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह बराबरी के हक की दावेदारी करेगी। जब गठबंधन के भविष्य पर सवाल पूछा गया, तो अजय राय ने सारा दारोमदार पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी पर डाल दिया। उन्होंने कहा कि यूपी में गठबंधन की दिशा और रूपरेखा प्रियंका गांधी ही तय करेंगी, जिससे स्पष्ट है कि इस मुद्दे पर बातचीत सिर्फ शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही होगी।
सपा और कांग्रेस के बीच यह जुबानी जंग नई नहीं है। इससे पहले 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव और यूपी के घोसी उपचुनाव के वक्त भी दोनों दलों के नेताओं में तीखी बयानबाजी हो चुकी है। अब 2027 के चुनाव नजदीक आते ही वर्चस्व की वही पुरानी लड़ाई नए रूप में सामने आ रही है।
Also Read: भगोड़ा थानेदार अधिकारियों को दे रहा धमकी, व्हाट्सएप स्टेटस पर लिखा- जल्द वापसी कर खोलूंगा सबकी पोल

