अफसरों के हस्ताक्षर पर हर महीने खर्च हो रहे डेढ़ लाख रुपये, प्रयागराज से लखनऊ भेजी जा रहीं फाइलें
Sandesh Wahak Desk: आबकारी विभाग के कामकाज में अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दावा है कि प्रयागराज के मम्फोर्डगंज स्थित आबकारी मुख्यालय से फाइलें अधिकारियों के हस्ताक्षर के लिए लखनऊ स्थित कैंप कार्यालय भेजी जा रही हैं। फाइलों की इस आवाजाही पर हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपये तक खर्च होने की बात सामने आई है। विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक यह खर्च कई महीनों से जारी है।
नियमों के अनुसार आबकारी आयुक्त समेत वरिष्ठ अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम तीन दिन प्रयागराज मुख्यालय में बैठकर विभागीय कामकाज की निगरानी करनी चाहिए। हालांकि, विभागीय सूत्रों का दावा है कि आबकारी आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी पिछले कई महीनों से मुख्यालय नहीं आए हैं।
फाइलों के निस्तारण में देरी का आरोप
बता दें कि अधिकारियों के प्रयागराज में उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थानीय स्तर पर निपटाई जा सकने वाली फाइलें भी लखनऊ भेजी जा रही हैं। विभागीय कामकाज से जुड़े लोगों का कहना है कि फाइलें लखनऊ भेजने और वापस प्रयागराज मंगाने में लगातार सरकारी धन खर्च हो रहा है। इससे फाइलों के निस्तारण में अतिरिक्त समय लगने का भी आरोप है।
अधिकारी बोले, शासन स्तर पर होते हैं फैसले
वहीं आला अधिकारियों का कहना है कि कई फैसले शासन स्तर पर लिए जाते हैं। ऐसे मामलों में फाइल लखनऊ मंगाने पर शासन के अधिकारियों से सीधे बातचीत हो जाती है।
इस मामले में एक मीडिया चैनल ने आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह से फोन पर बात करने की कोशिश की। सवाल सुनते ही उन्होंने कॉल काट दी। उन्हें मैसेज भी भेजा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अधिकारियों की मुख्यालय में मौजूदगी और फाइलों की आवाजाही को लेकर विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
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