SIR से लेकर Gen Z की नाराजगी तक, मुरली मनोहर जोशी ने अपनी ही सरकार को घेरा, बोले- ‘नौकरियां कहां हैं?’
Murli Manohar Joshi on SIR: भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने देशभर में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सरकारों की सत्ता में बने रहने की प्रवृत्ति पर टिप्पणी की है। अंग्रेजी अखबार द हिंदू को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यह कड़वी सच्चाई है कि हर सरकार सत्ता में बने रहना चाहती है।
जोशी ने अपने बयान के समर्थन में परिसीमन (Delimitation) का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) सरकार के दौरान 2000 में परिसीमन टाला गया था, क्योंकि उस समय भी सत्ता में बने रहने की चिंता थी। उन्होंने 1976 में परिसीमन टाले जाने को भी इसी संदर्भ से जोड़ा।
‘भरोसा नहीं होगा तो अच्छी चीज भी स्वीकार नहीं होगी’
मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार चलाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि चुनाव निष्पक्ष हों, सरकार जवाबदेह रहे और नौकरशाही में पारदर्शिता हो। उन्होंने कहा कि जहां भरोसा नहीं होता, वहां लोग अच्छी चीजों को भी स्वीकार नहीं करते।
उन्होंने प्रदर्शनों से निपटने के तरीके पर भी सरकार की आलोचना की। Murli Manohar Joshi ने कहा कि अगर लोगों की आवाज उठ रही है तो उसका समाधान किया जाना चाहिए, केवल सख्ती से स्थिति नहीं संभाली जा सकती।
‘जेन जी नाराज क्यों है? नौकरियां कहां हैं?’
युवाओं और जेनरेशन जी (Gen Z) के बीच असंतोष पर जोशी ने कहा कि सरकारों ने ऐसी आकांक्षाएं पैदा कीं जो वास्तविकता से दूर थीं। उन्होंने रोजगार के वादों का जिक्र करते हुए सवाल किया कि आखिर नौकरियां कहां हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले पर भी उन्होंने सरकार की जिम्मेदारी तय करने की बात कही। जोशी ने कहा कि जब ट्रस्ट का गठन सरकार ने किया है तो उसमें होने वाली गतिविधियों की जिम्मेदारी भी सरकार की बनती है।
विकास हो, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं
जोशी ने हिमालयी क्षेत्र में सड़क निर्माण और पर्यावरण नीति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास टिकाऊ होना चाहिए और पर्यावरण का ध्यान रखा जाना चाहिए।
बद्रीनाथ में आयोजित तेज संगीत वाले कार्यक्रम का जिक्र करते हुए Murli Manohar Joshi ने इसे मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के विपरीत बताया। अंत में जोशी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें लगता है कि देश अपनी राह से भटक गया है, लेकिन इतिहास बताता है कि भारत ने गलत दिशा में जाने के बाद दोबारा रास्ता खोजा है।
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