Barabanki News: पूरे मुल्क और दुनिया में अमन-चैन कुरानी शिक्षाओं पर अमल करने से ही संभव- मुफ्ती जहीरुल इस्लाम कासमी

Barabanki News: दारुल उलूम फतेहपुर (बाराबंकी) के हिफ्ज-ए-कुरआन विभाग में 12 नए छात्रों का चयन किया गया।

इस मौके पर संस्थान में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें उलेमा, शिक्षक, अभिभावक और छात्र शामिल हुए।

कार्यक्रम में संस्थान के संरक्षक मौलाना मुफ्ती मोहम्मद जहीरुल इस्लाम कासमी ने नवनिर्वाचित छात्रों को कुरआन शरीफ का पहला सबक पढ़ाकर हिफ्ज की शुरुआत कराई।

मुफ्ती जहीरुल इस्लाम कासमी ने कहा कि हिफ्ज-ए-कुरआन बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कुरआन की शिक्षा पर अमल करने से इंसान के जीवन में अच्छे आचरण और चरित्र का विकास होता है।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को कुरआन की तालीम देने के साथ खुद भी नियमित रूप से कुरआन पढ़ने और उसे समझने की कोशिश करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि दारुल उलूम फतेहपुर का उद्देश्य कुरआनी शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो धार्मिक शिक्षा के साथ अच्छे आचरण और जिम्मेदारी को भी अपने जीवन में उतारे।

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दीनी और आधुनिक शिक्षा पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना हारून कासमी ने हिफ्ज के दौरान शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि हिफ्ज का सफर मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास की मांग करता है।

डॉ. जमालुद्दीन ने संस्थान में हिफ्ज के साथ आधुनिक शिक्षा दिए जाने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों तरह की शिक्षा का समन्वय बच्चों के भविष्य के लिए उपयोगी है।

कार्यक्रम के प्रभारी और निगरान-ए-आला कारी अब्दुर्रहमान ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और शिक्षकों का आभार जताया। कार्यक्रम का समापन मुफ्ती मोहम्मद जहीरुल इस्लाम कासमी की दुआ के साथ हुआ।

इस मौके पर मौलाना जियाउल हसन नदवी, कारी मोहम्मद अरमान मजाहिरी, हाजी फजील अहमद सिद्दीकी, हाजी मोहम्मद इमरान, डॉ. मोहम्मद फुरकान, हाफिज मोहम्मद कफील, हाजी हसीबुर्रहमान, हाजी फुरकान और मास्टर उमर अब्दुल्ला समेत कई लोग मौजूद रहे।

रिपोर्ट- नफीस अहमद

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