UP की वोटर लिस्ट में जुड़े 84.3 लाख नए नाम, 16.18 लाख आवेदनों का हिसाब नहीं, SIR लिस्ट पर सवाल
UP SIR: उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर एक नई रिपोर्ट में 16.18 लाख वोटरों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की पड़ताल के मुताबिक, इन लोगों ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने से पहले Form-6 के जरिए नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनके आवेदन की विधानसभा और बूथ स्तर की विस्तृत जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के CEO की वेबसाइट पर 403 विधानसभा क्षेत्रों से 71.38 लाख Form-6 आवेदनों की जानकारी सार्वजनिक की गई। वहीं SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची में 84.3 लाख नए मतदाता जोड़े गए। दोनों आंकड़ों के बीच करीब 12.92 लाख का अंतर सामने आता है।
16.18 लाख आवेदनों का डेटा कहां है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने एक चरण में बताया था कि 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने से पहले ही करीब 16.18 लाख Form-6 आवेदन प्राप्त हुए थे। UP के CEO के आंकड़ों पर आधारित पहले की रिपोर्टिंग में भी यह संख्या दर्ज है।
रिपोर्टर्स कलेक्टिव का कहना है कि इन शुरुआती आवेदनों की विधानसभा और बूथ स्तर की जानकारी सार्वजनिक नहीं होने से स्वतंत्र रूप से यह जांचना मुश्किल है कि आवेदन किन लोगों ने और किन क्षेत्रों से किए थे। रिपोर्ट के अनुसार, CEO की वेबसाइट पर सार्वजनिक किए गए Form-6 डेटा में 6 जनवरी 2026 से पहले दाखिल आवेदन दिखाई नहीं देते।
SIR में हटे थे करोड़ों नाम
SIR की ड्राफ्ट सूची 6 जनवरी 2026 को जारी हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें करीब 2.89 करोड़ नाम हटाए गए थे। इन मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में रखा गया था।
द रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने सवाल उठाया है कि सार्वजनिक किए गए 71.38 लाख आवेदनों की तुलना में अंतिम सूची में 84.3 लाख नए नाम कैसे जुड़े और 16.18 लाख शुरुआती आवेदनों का विस्तृत डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। वहीं UP के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने रिपोर्ट को बताया कि आंकड़ों में कोई mismatch नहीं है और अंतर उनकी व्याख्या में है।
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