भारतीय हॉकी का एशिया में दबदबा, जानें पुरुष और महिला टीमों के प्रदर्शन पर डॉ. आरपी सिंह ने क्या कहा?
Lucknow News: भारतीय हॉकी ने एशियाई प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर अपनी स्थिति मजबूत की है। पुरुष और महिला टीमों की सफलताओं के बाद अब चुनौती इस प्रदर्शन को विश्व स्तर पर दोहराने की है। भारतीय हॉकी टीम के मुख्य चयनकर्ता और उत्तर प्रदेश हॉकी के अध्यक्ष डॉ. आरपी सिंह ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टीमों की उपलब्धियों, चयन प्रक्रिया और भविष्य की योजनाओं पर बात की।
डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि जापान में आयोजित 20वें एशियाई खेलों में भारतीय पुरुष और महिला, दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने कहा कि अब खिलाड़ियों को लगातार बेहतर अवसर देने और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए तैयार करने की जरूरत है, ताकि विश्व स्तर पर भी भारतीय हॉकी के अच्छे दिन लौट सकें।
उन्होंने बताया कि चयन समिति खिलाड़ियों के मौजूदा प्रदर्शन, फिटनेस और अंतरराष्ट्रीय अनुभव को ध्यान में रखकर टीम का बेहतर संयोजन तैयार करने की कोशिश करती है। सीनियर टीम के साथ जूनियर और अंडर-18 स्तर पर प्रतिभाओं को तैयार करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

एशियाई प्रतियोगिताओं में भारतीय टीमों की बड़ी उपलब्धियां
डॉ. आरपी सिंह के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय हॉकी टीमों ने एशियाई स्तर पर लगातार अच्छे परिणाम दिए हैं। प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
- 20वें एशियाई खेल: जापान में पुरुष और महिला टीमों ने स्वर्ण पदक जीते।
- 19वें एशियाई खेल, 2023: पुरुष टीम ने स्वर्ण और महिला टीम ने कांस्य पदक हासिल किया।
- एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, 2023: पुरुष टीम विजेता बनी। रांची में आयोजित महिला एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भी भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीता।
- पेरिस ओलंपिक, 2024: भारतीय पुरुष टीम ने कांस्य पदक जीता। इसके बाद टीम ने एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में फिर स्वर्ण अपने नाम किया।
- राजगीर एशिया कप, 2025: पुरुष टीम चैंपियन बनी, जबकि 31वें सुल्तान अजलान शाह कप में भारतीय टीम ने रजत पदक जीता।
- महिला हॉकी: 2024 में राजगीर महिला एशियन चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता। 2025 महिला एशिया कप में टीम उपविजेता रही और 2026 एफआईएच महिला नेशंस कप में पहला स्थान हासिल किया।
इन उपलब्धियों के आधार पर चयन समिति अब खिलाड़ियों को बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए तैयार करने पर जोर दे रही है।
जूनियर और फाइव-ए-साइड हॉकी में भी मिली सफलता
भारतीय हॉकी की सफलता सीनियर टीमों तक सीमित नहीं है। जूनियर और अंडर-18 स्तर पर भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते हैं।
वर्ष 2026 में चीन में आयोजित जूनियर एशिया कप में पुरुष और महिला, दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक हासिल किए। काकामीगाहारा में हुए अंडर-18 एशिया कप में पुरुष टीम ने स्वर्ण और महिला टीम ने कांस्य पदक जीता।
वर्ष 2025 में तमिलनाडु में आयोजित एफआईएच पुरुष जूनियर विश्व कप में भारतीय टीम ने कांस्य पदक हासिल किया। सुल्तान जोहोर कप 2025 में टीम उपविजेता रही। इससे पहले 2024 और 2023 में भी भारतीय टीम ने इस प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था। वर्ष 2024 में मस्कट में आयोजित जूनियर एशिया कप में पुरुष और महिला, दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीते थे।
फाइव-ए-साइड हॉकी में भी भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है। वर्ष 2026 में एशियन हॉकी फाइव-ए-साइड प्रतियोगिता में पुरुष टीम विजेता और महिला टीम उपविजेता बनी। वहीं, 2024 में एफआईएच फाइव-ए-साइड महिला विश्व कप में भारतीय महिला टीम ने रजत पदक जीता था।
विश्व स्तर पर पदक जीतना अगली बड़ी चुनौती
एशिया में लगातार सफलताओं के बावजूद विश्व स्तर पर भारतीय टीमों के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। वर्ष 2026 के एफआईएच हॉकी विश्व कप में भारतीय पुरुष टीम आठवें और महिला टीम पांचवें स्थान पर रही। ऐसे में एशियाई प्रतियोगिताओं की सफलता को विश्व स्तर पर पदक में बदलना चयन समिति के लिए बड़ी चुनौती है।
डॉ. आरपी सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों को लगातार अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने से टीम को मजबूत बनाया जा सकता है। इसके लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के जरिए संभावित खिलाड़ियों को बड़े मुकाबलों के लिए तैयार किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. आनन्देश्वर पाण्डेय ने एशियाई खेलों में पुरुष और महिला टीमों के स्वर्ण पदक जीतने पर खुशी जताई। उन्होंने इसे पूरे देश के लिए गर्व की बात बताया। डॉ. पाण्डेय ने कहा कि मुख्य चयनकर्ता के रूप में डॉ. आरपी सिंह के अनुभव का लाभ भारतीय हॉकी को मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय टीमें आगे भी अच्छा प्रदर्शन कर विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगी।
उत्तर प्रदेश हॉकी के सचिव रजनीश मिश्रा ने भी डॉ. आरपी सिंह के लंबे अनुभव और हॉकी से उनके जुड़ाव को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी आगे भी बेहतर प्रदर्शन करेगी। साथ ही, उत्तर प्रदेश में हॉकी को बढ़ावा देने और नई प्रतिभाओं को आगे लाने के प्रयास जारी हैं।
पूर्व कप्तान रहे हैं डॉ. आरपी सिंह
डॉ. आरपी सिंह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके हैं। उन्होंने 1986 के सियोल और 1990 के बीजिंग एशियाई खेलों, 1989 एशिया कप तथा 1986 और 1990 विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। वह 1988 प्री-ओलंपिक और सुल्तान अजलान शाह कप की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम के सदस्य भी रहे।
प्रशासक के रूप में उनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं। इनमें 2016 का लखनऊ जूनियर हॉकी विश्व कप और 2019 की इंडो-फ्रांस महिला हॉकी टेस्ट सीरीज प्रमुख हैं।
भारतीय हॉकी के सामने अब एशियाई स्तर पर मिली सफलता को विश्व मंच पर बेहतर नतीजों में बदलने की चुनौती है। इसके लिए सीनियर टीमों के प्रदर्शन के साथ जूनियर खिलाड़ियों को तैयार करना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय अनुभव देना अहम माना जा रहा है।
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