मथुरा में चिलचैट ऐप से करोड़ों की कमाई का आरोप, हांगकांग से आता था कमीशन
Mathura News: उत्तर प्रदेश के मथुरा में ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉलिंग और लाइव होस्टिंग ऐप के जरिए कथित अवैध वित्तीय गतिविधियों का मामला सामने आया है। एसटीएफ के मुताबिक, मोतीकुंज इलाके में चल रहे इस नेटवर्क में फर्जी आईडी बनाकर लड़कियों से लाइव होस्टिंग कराई जाती थी। गिफ्टिंग और वीडियो कॉलिंग के जरिए कमाई होती थी। इस मामले में एसटीएफ ने रविवार तड़के कथित मास्टरमाइंड प्रवीन कुमार समेत तीन युवकों को गिरफ्तार किया था।
जांच में विदेशी कंपनी से कमीशन मिलने और करोड़ों रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चमेट नाम से पहचाने जाने वाले इस ऐप का नाम अब चिलचैट बताया जा रहा है। एसटीएफ ऐप की गतिविधियों, विदेशी लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
15 हजार रुपये वेतन पर लड़कियों को रखा जाता था
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, गिरोह कथित तौर पर फर्जी आईडी बनाकर लड़कियों को लाइव होस्टिंग के लिए भर्ती करता था। उन्हें बातचीत यानी होस्टिंग के काम के लिए करीब 15 हजार रुपये महीने का वेतन दिया जाता था। ऐप पर गिफ्टिंग और वीडियो कॉलिंग के जरिए कमाई का नेटवर्क चलाया जा रहा था।
गृह मंत्रालय से मिले इनपुट के बाद एसटीएफ लखनऊ ने रविवार सुबह मथुरा के हाईवे थाना क्षेत्र स्थित मोतीकुंज में छापा मारा। कार्रवाई में कथित मास्टरमाइंड प्रवीन कुमार, जो इंटरमीडिएट पास बताया गया है, समेत तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया। एसटीएफ के अनुसार, गिरोह के सदस्य ऐप के जरिए कथित अवैध वित्तीय गतिविधियां चला रहे थे।
जांच में फुलियाओ हॉन्ग कोंग लिमिटेड जैसी विदेशी संस्था से भुगतान मिलने की बात सामने आई है। आरोपियों के बैंक खातों में कमीशन की रकम भी इसी कंपनी से आने की जानकारी मिली है। पुलिस और एसटीएफ अब मथुरा और दिल्ली में आरोपियों के बैंक खातों की जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि खातों से हांगकांग, चीन या अन्य किन देशों में रकम भेजी गई।
एफसीआरए के नियमों की भी जांच, दूसरे जिलों तक पहुंचा नेटवर्क
विदेशी संस्थाओं से लेनदेन सामने आने के बाद जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि संबंधित लोगों ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी एफसीआरए के नियमों का पालन किया या नहीं। यह कानून पात्र संस्थाओं, ट्रस्टों और गैर-सरकारी संगठनों को मिलने वाले विदेशी अंशदान और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो आरोपियों के खिलाफ इस कानून के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मथुरा के अलावा लखनऊ, गाजियाबाद और वाराणसी में भी चमेट ऐप से जुड़ी गतिविधियों की जांच की जा रही है। एजेंसियां इन शहरों में ऐप के इस्तेमाल, उससे जुड़े लोगों और नेटवर्क के विस्तार के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
2023 में प्ले स्टोर से हटाया गया था ऐप
जानकारी के मुताबिक, गूगल ने अगस्त 2023 में यूजर जनरेटेड कंटेंट नीति के उल्लंघन के कारण चमेट ऐप को प्ले स्टोर से हटा दिया था। आरोप है कि इसके बाद भी लोगों को ऐप से जोड़ने और कमाई का सिलसिला जारी रखने के लिए एपीके फाइल भेजने का तरीका अपनाया गया।
आरोपियों पर करीब चार साल तक इस ऐप के जरिए करोड़ों रुपये कमाने का आरोप है। एसटीएफ अब ऐप को संबंधित प्राधिकरणों से मान्यता मिलने या न मिलने, विदेशी भुगतान, बैंक खातों के लेनदेन और इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
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