बसों में सवारी नहीं, ऊपर से वेतन कटौती! लखनऊ में रोडवेज ड्राइवर-कंडक्टरों का प्रदर्शन
Lucknow Roadways Drivers Protest: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को रोडवेज के चालक-परिचालकों का गुस्सा फूट पड़ा। परिवहन विभाग की नीतियों और आय में कटौती से नाराज कर्मचारियों ने अवध बस स्टेशन (Awadh Bus Station) पर बसों का संचालन ठप कर दिया। बसों के पहिए थमने से यात्रियों को सफर के लिए परेशान होना पड़ा। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया और अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने पर नाराजगी जाहिर की।
चालक-परिचालकों का कहना है कि अवैध वाहनों के संचालन और बस स्टेशन के मुख्य द्वार के सामने किए गए डायवर्जन के कारण रोडवेज की बसों को पर्याप्त सवारियां नहीं मिल पा रही हैं। जिन स्थानों पर सरकारी बसों को यात्रियों को लेने पहुंचना चाहिए, वहां निजी बसें और प्राइवेट कारें पहुंच रही हैं। इससे परिवहन निगम की आय प्रभावित हो रही है और कर्मचारियों की कमाई पर भी असर पड़ रहा है।
50 प्रतिशत आय की बाध्यता खत्म करने की मांग
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के मुताबिक, संविदा पर तैनात चालक-परिचालक निर्धारित लोड फैक्टर और आय का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते हैं तो उनके वेतन से रिकवरी की जाती है। कर्मचारियों का आरोप है कि निर्धारित आय पूरी नहीं होने पर वेतन में कटौती की जाती है, जबकि अवैध वाहनों के संचालन पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
इसी के विरोध में चालक-परिचालक वेतन से होने वाली कटौती रोकने और 50 प्रतिशत आय की बाध्यता खत्म करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अधिकारियों से बातचीत, जल्द संचालन शुरू कराने का दावा
प्रदर्शन (Lucknow Roadways Drivers Protest) के दौरान कर्मचारियों और पुलिस प्रशासन के बीच तनातनी की स्थिति भी बनी रही। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि आला अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच रहे हैं। वहीं, बसों का संचालन बंद होने से यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी हुई।
लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने बताया कि प्रदर्शन कर रहे चालक-परिचालकों से बातचीत की जा रही है और जल्द बस संचालन शुरू कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि अवैध वाहनों की वजह से रोडवेज का संचालन प्रभावित होने के मामले में संयुक्त अभियान चलाकर रोक लगाई जाएगी। ऐसे प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, जिससे परिवहन निगम को नुकसान न हो और चालक-परिचालकों की आय भी प्रभावित न हो।
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