पकड़ा गया एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर झोटा का हत्यारा, 24 घंटे में पुलिस की कार्रवाई
Anti-Drug Activist Parvinder Jhotta Murder Case: पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर झोटा (Parvinder Jhotta) की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। फार्मेसी में हुए विवाद के दौरान गोलीबारी में झोटा की मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए थे। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था। पुलिस की यह कार्रवाई हत्या के 24 घंटे के भीतर की गई है।
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को झोटा एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे। वहां उन्होंने दुकान के मालिक अश्वनी कुमार से उस व्यक्ति के बारे में सवाल किया, जिसने कथित तौर पर उसी सुबह दुकान से नशीले पदार्थ खरीदे थे। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर गोलीबारी हुई, जिसमें झोटा की जान चली गई।
सोशल मीडिया पर नशे के कारोबार के खिलाफ उठाते थे आवाज
Parvinder Jhotta कथित नशा विक्रेताओं से सवाल करते हुए सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो बनाते थे। रिपोर्टों के अनुसार, घटना से पहले उनका मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार से सामना हुआ था। झोटा उस पर सिंथेटिक ड्रग्स बेचने का आरोप लगा रहे थे।
घटना का एक वीडियो भी सामने आया था। इसमें आरोपी को पिस्तौल से धमकाते और फिर गोली चलाते हुए देखा गया। झोटा ने अपनी मौत से कुछ दिन पहले मानसा में कथित अवैध नशीली दवाओं की बिक्री की जांच कराने के लिए सीबीआई (CBI) से भी अपील की थी।
परिवार और समर्थकों ने किया था प्रदर्शन
हत्या के बाद परविंदर झोटा के परिवार और समर्थकों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर मंगलवार को धरना दिया था। उन्होंने प्रशासन से बातचीत करने से भी इनकार कर दिया था।
गोलीबारी में Parvinder Jhotta के अलावा चार लोग घायल हुए थे। उनकी पहचान 65 वर्षीय बलतेज सिंह, 42 वर्षीय कुलविंदर सिंह, 24 वर्षीय हैप्पी सिंह और 30 वर्षीय गोबिंद सिंह के रूप में हुई है। इनमें से दो की हालत गंभीर बताई गई। उन्हें बेहतर इलाज के लिए बठिंडा रेफर किया गया था।
पहले भी सामने आ चुके हैं गोलीबारी के मामले
पंजाब में इससे पहले भी नशा-विरोधी समितियों से जुड़े लोगों और नशे के कारोबार का विरोध करने वालों की हत्या के मामले सामने आए हैं। मई 2026 में फगवाड़ा में आरटीआई एक्टिविस्ट और वकील सिमरनजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने शुरुआती जांच में हत्या को उनके चचेरे भाई के साथ लेन-देन के विवाद से जोड़कर देखा था और अन्य पहलुओं की भी जांच की थी।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में सिमरनजीत सिंह की हत्या और नशा-विरोधी अभियान के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिला। इसलिए इस मामले को नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने के कारण हुई हत्या के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।
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