सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, CJI बोले- न्यायपालिका को कोई नहीं डरा सकता
Sandesh Wahak Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च का मुद्दा भी उठा। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायपालिका को किसी भी तरह से डराया या धमकाया नहीं जा सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रकार के प्रयास बेहद कमजोर होते हैं और इन पर कोई ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि अदालतें जमीनी हकीकत से पूरी तरह वाकिफ हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक जुलूस निकाले जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने का प्रयास बताया। इस पूरे प्रकरण पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी कानूनी एजेंसियों को विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का सख्त निर्देश दिया है।
हमने कोई माफी नहीं मांगी: तुषार मेहता
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि मीडिया और सोशल मीडिया में सरकार द्वारा बिना शर्त माफी मांगे जाने को लेकर जो खबरें चल रही हैं, वे पूरी तरह भ्रामक हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट बंद करने के मामले में अदालत के नोटिस पर सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत जवाब दाखिल किया गया था, जिसमें स्पष्टीकरण दिए जाते हैं, लेकिन सरकार ने कोई माफी नहीं मांगी है। इस मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच कर रही है।
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट और बीएनएस 163 पर विचार
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि जंतर-मंतर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नहीं, बल्कि एक कमेटी की सिफारिश पर हटाया गया था।
अदालत ने कहा कि वह पहले सरकार का जवाब देखेगी और यदि संतोषजनक नहीं पाया गया, तो कानून अपना काम करेगा। इसके साथ ही, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि कोर्ट यह भी जांच करेगा कि जंतर-मंतर को हटाने का फैसला उचित विचार-विमर्श के बाद लिया गया था या नहीं। इसके अलावा, बीएनएस (BNS) की धारा 163 की वैधता और पुलिस के निवारक हिरासत (Preventive Detention) पर भी नोटिस जारी किया गया है।
महिला पत्रकार के आरोप बेहद गंभीर
सुनवाई के दौरान महिला पत्रकार के साथ हुई घटना का मुद्दा भी उठा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और इस मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी की जानी चाहिए। एसजी तुषार मेहता ने कहा कि मौजूदा समय में प्रदर्शन स्थलों पर यह पहचान करना बेहद कठिन हो गया है कि कौन वास्तविक पत्रकार है और कौन केवल रील बना रहा है। हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी महिला (चाहे वह पत्रकार हो या महिला पुलिसकर्मी) के साथ अभद्रता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
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