ट्रंप ने भारत-चीन को दी बड़ी राहत, 100 प्रतिशत आयात शुल्क का खतरा टला
Sandesh Wahak Digital Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी कच्चे तेल और गैस के खरीदारों पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से एक सख्त दंडात्मक कानून लागू तो कर दिया, लेकिन एक ही आदेश में इस पर तत्काल प्रभाव से रोक भी लगा दी। व्हाइट हाउस के इस कूटनीतिक फैसले से भारत और चीन जैसे उन प्रमुख देशों को बहुत बड़ी राहत मिली है, जो रूस से भारी मात्रा में ऊर्जा संसाधन आयात करते हैं। यदि यह छूट न मिलती तो 18 अक्टूबर की तय समयसीमा के बाद भारतीय और चीनी सामानों पर अमेरिका में 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लग जाता। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना हो रहे हैं।
शुक्रवार देर रात जारी आधिकारिक आदेश के माध्यम से ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शन्स रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ को प्रभावी बनाया गया, जिस पर राष्ट्रपति ट्रंप ने 18 सितंबर को हस्ताक्षर किए थे। इस कानून के नियमों के तहत, रूस से कच्चा तेल व गैस खरीदने वाले शीर्ष 5 आयातक देशों और रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाली संस्थाओं पर 30 दिनों के भीतर 100 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क लगाने का प्रावधान था। वहीं रूस से सीधे आने वाले सामान पर यह शुल्क 500 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता था। हालांकि, आदेश की धारा 4 का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इन तमाम सख्त प्रावधानों और पेनल्टी टैरिफ को राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए तुरंत प्रभाव से निलंबित (माफ) कर दिया।
अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगी छूट
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को एक लिखित प्रमाण पत्र और गोपनीय रिपोर्ट भेजकर स्पष्ट किया है कि यह छूट अमेरिका के राष्ट्रीय हित में आवश्यक है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि रूसी तेल आयात करने वाले देशों पर से दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को विदेश, वित्त और ऊर्जा मंत्रालयों के साथ मिलकर यह निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं कि कौन-कौन से देश रूस से तेल-गैस खरीद रहे हैं। यदि भविष्य में अमेरिकी सरकार को आवश्यकता महसूस हुई, तो राष्ट्रपति इस छूट को वापस लेकर दोबारा कार्रवाई कर सकते हैं।
यह कूटनीतिक रियायत ऐसे समय में दी गई है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच समरकंद, मुंबई और जामनगर के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं। 20 अक्टूबर को मुंबई में उनकी भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित है। इसके अलावा रुबियो दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में से एक गुजरात के जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का भी दौरा करेंगे। भारत और अमेरिका वर्तमान में अपने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं, ऐसे में अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले से दोनों देशों के आर्थिक व कूटनीतिक रिश्तों को और मजबूती मिलेगी।
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