UP में बेसिक शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच के आदेश, सिपाही-होमगार्ड भर्ती में भी होगा री-मेडिकल

Allahabad High Court Verdict: उत्तर प्रदेश (UP) में बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा 1 से 8 तक के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षकों के नियुक्ति पत्र और शैक्षिक अभिलेखों की जांच होगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों या दूसरे व्यक्तियों के प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए यह आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने शिक्षकों को अधिसूचना की जानकारी मिलने के एक सप्ताह के भीतर संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के कार्यालय में अपने दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है।

इसी के साथ हाई कोर्ट ने पुलिस सिपाही भर्ती-2025 और होमगार्ड भर्ती-2025 में शारीरिक माप के आधार पर अयोग्य घोषित किए गए कुछ अभ्यर्थियों को भी राहत दी है। चार श्रेणियों के अभ्यर्थियों की लंबाई या सीने की माप दोबारा कराने के लिए स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा।

एक प्रमाणपत्र पर कई नियुक्तियों का मामला

शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच का आदेश कुसुमलता की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। सुनवाई में एसटीएफ लखनऊ के एएसपी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, गोरखपुर जिले के कोडिपुर स्थित बरईपार कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका कुसुमलता श्रीवास्तव के शैक्षिक दस्तावेजों का कथित तौर पर धोखाधड़ी से इस्तेमाल कर नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया।

Allahabad High Court ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों पर चिंता जताई। कहा गया कि कई मामलों में एक ही शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर दस या उससे अधिक लोगों की नियुक्ति होने की बात सामने आई है। कोर्ट ने इस समस्या को पिछले दो दशकों से चली आ रही फर्जी नियुक्तियों की प्रवृत्ति से भी जुड़ा बताया।

बेसिक शिक्षा अधिकारियों को शिक्षकों के नाम और शैक्षिक योग्यता की सूची तैयार करनी होगी। संबंधित दस्तावेजों के साथ यह सूची एसटीएफ के क्षेत्रीय कार्यालय को भेजी जाएगी। कोर्ट ने विभाग को जांच में एसटीएफ का सहयोग करने का निर्देश दिया है।

सिपाही-होमगार्ड भर्ती में 31 अक्टूबर को दोबारा माप

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस सिपाही भर्ती-2025 और होमगार्ड भर्ती-2025 में शारीरिक माप के आधार पर अयोग्य घोषित किए गए अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चार श्रेणियों के अभ्यर्थियों को दोबारा माप का अवसर दिया है। इसके लिए स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड का गठन होगा और जांच 31 अक्टूबर 2026 को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), लखनऊ में कराई जाएगी।

याचियों का कहना था कि वे पहले पुलिस और होमगार्ड की शारीरिक दक्षता संबंधी जांच में मानकों के अनुरूप पाए गए थे, लेकिन मौजूदा भर्ती में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। हालांकि, जिन अभ्यर्थियों की दो बार माप में समान परिणाम आया था और जिन्होंने निजी चिकित्सकों के प्रमाणपत्रों के आधार पर दोबारा जांच की मांग की थी, उनकी याचिकाएं कोर्ट ने खारिज कर दीं।

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