वाराणसी में रामलीला का हाथी हुआ बेकाबू, हमले में महावत घायल, गोरखपुर से बुलाई गई विशेष टीम

Varanasi News: उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक शहर वाराणसी के रामनगर स्थित पंचवटी मैदान में रविवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। रामलीला में शामिल होने आया एक हाथी अचानक बेकाबू हो गया और उसने अपने ही महावत पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल महावत को तत्काल इलाज के लिए बीएचयू ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। हाथी के बेकाबू होकर इधर-उधर घूमने के कारण एहतियात के तौर पर आसपास के पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और पंचवटी मैदान की ओर जाने वाले रास्तों पर पुलिस ने आवागमन पूरी तरह रोक दिया है। हाथी को सुरक्षित नियंत्रित करने के लिए अब गोरखपुर से एक स्पेशल टीम बुलाई जा रही है।

गन्ने का लालच देकर एक स्थान पर रोकने का किया जा रहा प्रयास

रविवार सुबह करीब 11 बजे हुई इस घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आ गया। मौके पर वन विभाग की टीम को भी बुला लिया गया। इंस्पेक्टर संजय मिश्रा ने बताया कि हाथी को शांत करने और एक जगह पर रोके रखने के लिए उसके सामने गन्ना फेंका गया है, ताकि वह उसमें उलझा रहे। चूंकि स्थानीय वन विभाग के पास हाथियों को नियंत्रित करने के आधुनिक संसाधन सीमित हैं, इसलिए गोरखपुर से विशेष विशेषज्ञों की टीम को रवाना किया गया है, जिसके पहुँचने के बाद ही हाथी को पूरी तरह काबू में किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि यही हाथी रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला के मंचन में भी उपयोग किया जाता है।

200 साल पुराना है रामनगर की रामलीला का इतिहास

दूसरी ओर, रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला अपने तय शेड्यूल के अनुसार आगे बढ़ रही है। बता दें कि रामनगर की इस रामलीला का इतिहास लगभग 200 वर्ष पुराना है, जो अपनी अनूठी परंपराओं और बिना किसी लाउडस्पीकर के पारंपरिक मंचन के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। यहाँ की रामलीला को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु पहुँचते हैं। आज (रविवार) को इस भव्य रामलीला में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहने वाला रावण युद्ध का मंचन होना है।

बीते शनिवार के मंचन के प्रसंगों को याद करते हुए जानकारों ने बताया कि लीला के 23वें दिन मंदोदरी, विभीषण और कुंभकरण द्वारा लाख समझाने के बावजूद अहंकारी रावण अपनी जिद पर अड़ा रहा। विनाशकाल के नजदीक आते ही उसकी मति मारी गई और उसने प्रभु श्रीराम से बैर मोल ले लिया। इसके बाद युद्धभूमि में उतरे विशालकाय कुंभकरण का श्रीराम ने वध किया, जिसका कटा हुआ सिर लंका जा गिरा जिसे देख रावण फूट-फूटकर रोया। इसके पश्चात, अपने पुत्र मेघनाद के भी युद्ध में वीरगति को प्राप्त होने की जानकारी मिलते ही रावण मूर्छित हो गया। इसी भावुक और भव्य प्रसंग के साथ शनिवार की लीला को आरती के बाद विराम दिया गया था, और आज राम-रावण युद्ध के रोमांचक मंचन की तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

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