‘चुनाव लड़ने का अधिकार आजीविका जितना अहम’, इलाहाबाद HC ने उम्रकैद की सजा पर लगाई रोक
Allahabad News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव लड़ने के अधिकार को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अधिकार आम आदमी की आजीविका के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है। अदालत ने कहा कि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने से मतदाताओं के हित भी प्रभावित हो सकते हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने वाराणसी के चर्चित व्यापारी नेता प्रमोद कुमार निगम हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि और सजा पर अपील के अंतिम फैसले तक रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने तीन पन्नों के आदेश में सुप्रीम कोर्ट के अफजल अंसारी मामले के फैसले का भी हवाला दिया। वाराणसी की ट्रायल कोर्ट ने 15 अप्रैल 2025 को नंदलाल राय को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामला 17 जनवरी 2017 को हुए प्रमोद कुमार निगम हत्याकांड से जुड़ा है।
जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी का दिया हवाला
Allahabad High Court ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के प्रति विशेष दायित्व होता है। दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने से उनके चुनाव लड़ने का अवसर समाप्त हो सकता है। अदालत ने अपील पर अंतिम निर्णय आने तक दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाना उचित माना। यह आदेश अपील के अंतिम नतीजे पर फैसला नहीं है।
काम के बोझ का हवाला देकर रिमांड देने पर भी सख्ती
एक अन्य मामले में Allahabad High Court ने कहा कि काम का बोझ बताकर रिमांड मजिस्ट्रेट जल्दबाजी में किसी आरोपी को हिरासत में नहीं भेज सकते। अदालत के मुताबिक, ऐसा करना लापरवाही के साथ आरोपी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी हो सकता है।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने साइबर धोखाधड़ी के मामले में कुशीनगर निवासी अरविंद पांडे की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार कर उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया।
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