Lucknow News: पीलीभीत वोटर लिस्ट पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, 13,150 मतदाताओं के डेटा में गड़बड़ी का दावा
13,150 मतदाताओं के डेटा में अनियमितता का दावा, 804 नाम गायब होने और 2,600 अतिरिक्त नाम जुड़ने का आरोप
Lucknow News: पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
बुधवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में पार्टी की सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म विभाग की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुप्रिया श्रीनेत ने दस्तावेजों और आंकड़ों का हवाला देते हुए मतदाता सूची में गड़बड़ी का दावा किया।
सुप्रिया श्रीनेत के मुताबिक, पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र (127) में 13,150 मतदाताओं के डेटा में अनियमितताएं सामने आई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची का अंतिम ड्राफ्ट जारी होने के बाद भी कई मतदाताओं के नाम और विवरण गलत दर्ज हैं। उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं के नामों में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया।
सही EPIC नंबर के बावजूद नामों में गड़बड़ी का आरोप
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मतदाताओं के पहचान संख्या यानी EPIC नंबर सही होने के बावजूद सूची में नाम गलत दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने 804 मतदाताओं के नाम गायब होने और 2,600 अतिरिक्त नाम जोड़े जाने का भी आरोप लगाया। श्रीनेत ने इन आंकड़ों के आधार पर कुल 16,554 वोटों से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।
उन्होंने निर्वाचन आयोग के साथ सूचना प्रौद्योगिकी महानिदेशक सीमा खन्ना की भूमिका पर भी सवाल किए।

श्रीनेत का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करना आयोग की जिम्मेदारी है और ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
आराधना मिश्रा और इमरान मसूद ने भी जताई चिंता
प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने भी कथित गड़बड़ियों पर चिंता जताई।
कांग्रेस नेताओं ने लोगों से मतदाता सूची में अपना नाम, पहचान संख्या और अन्य विवरण जांचने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण होना चाहिए।
कांग्रेस के आरोपों के बाद मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के लिए संबंधित रिकॉर्ड, निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पक्ष और जांच के निष्कर्ष अहम होंगे।
फिलहाल मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में है।
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