कुशीनगर में विज्ञान का अद्भुत नजारा, एक साथ चार कैनसैट रॉकेट लॉन्च, ISRO ने बताया- ऐतिहासिक सफलता
Sandesh Wahak Digital Desk: कुशीनगर के सेवरही विकास खंड के रकबा जंगली पट्टी स्थित जीरो बंधा के समीप सोमवार को विज्ञान का एक रोमांचक और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और इन-स्पेस (IN-SPACe) के निर्देशन में आयोजित रॉकेट्री एवं कैनसैट लॉन्च प्रतियोगिता के पहले दिन एक साथ चार रॉकेट सफलतापूर्वक आसमान में लॉन्च किए गए और पैराशूट के सहारे धीरे-धीरे धरती पर लौट आए।

यह नजारा देखते ही कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। युवा वैज्ञानिकों के चेहरे सफलता की खुशी से खिल उठे, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों ने इस उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई दी।

ऐतिहासिक सफलता
चार दिवसीय रॉकेट्री प्रतियोगिता का शुभारंभ सोमवार सुबह ISRO इन-स्पेस के निदेशक डॉ. विनोद कुमार और वरिष्ठ वैज्ञानिकों की देखरेख में हुआ। तकनीकी कारणों से कुछ देरी के बाद, जैसे ही पहला रॉकेट 9:30 बजे प्रक्षेपित हुआ, परिसर उत्साह से झूम उठा।
मौके पर उपस्थित ISRO इन-स्पेस निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने इसे भारत के इतिहास में पहला अवसर बताया, जब एक साथ चार कैनसैट (Cansat) का सफल परीक्षण किया गया है। उन्होंने कहा, “यह हमारे छात्र वैज्ञानिकों की प्रतिभा और समर्पण का प्रमाण है।”

रॉकेटों की ऊंचाई
प्रक्षेपित किए गए रॉकेटों की ऊंचाई इस प्रकार रही:
- पहला कैनसैट: लगभग 1000 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और सुरक्षित उतरा।
- दूसरा कैनसैट: 600 मीटर की ऊंचाई तक गया।
- तीसरा कैनसैट: 800 मीटर की ऊंचाई तक गया।
- चौथा कैनसैट: 900 मीटर की ऊंचाई तक गया।
आयोजन का उद्देश्य
यह प्रतियोगिता एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा ISRO, इन-स्पेस और एनएसआईएल (NSIL) के सहयोग से आयोजित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर के छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी के प्रति रुचि और नवाचार की भावना को बढ़ावा देना है।
इस आयोजन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से आए युवा वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया, जिनमें केरल से आए श्रीनाथन, मुरली, अश्विन, आदित्य, किरनाथना और वेंकटेश प्रमुख रहे। शेष छह रॉकेटों का प्रक्षेपण आगामी सत्रों में किया जाएगा।

सांसद ने दी बधाई
आयोजन में शामिल देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने युवा वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता पूर्वांचल के लिए गर्व की बात है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये युवा ही आने वाले समय में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की रीढ़ साबित होंगे।
इस अवसर पर उपजिलाधिकारी तमकुहीराज आकांक्षा मिश्रा, सीओ राकेश प्रताप सिंह, थानाध्यक्ष सेवरही धीरेंद्र राय, सांसद प्रतिनिधि धीरज त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, छात्र और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
रिपोर्ट: राघवेंद्र मल्ल
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