हेट स्पीच केस में गई अब्बास अंसारी की विधायकी, दो साल की सजा और लगा जुर्माना
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के मऊ से विधायक और पूर्व सांसद मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को एक भड़काऊ भाषण मामले में कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा और तीन हजार रुपये जुर्माना सुनाया है। सजा के ऐलान के साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता भी रद्द हो गई है।
मऊ जनपद स्थित एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. के.पी. सिंह ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट के फैसले के बाद विधानसभा अध्यक्ष जल्द ही एक नोटिफिकेशन जारी करेंगे, जिसमें अब्बास की सदस्यता आज की तारीख से प्रभावी रूप से समाप्त मानी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, अगर किसी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उनकी सदस्यता स्वतः निरस्त हो जाती है। यह नियम जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(4) के हटाए जाने के बाद लागू हुआ है।
इस केस में मंसूर अंसारी नामक सह-आरोपी को भी दोषी करार दिया गया है। कोर्ट ने उन्हें छह महीने की जेल और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 3 मार्च 2022 का है, जब विधानसभा चुनाव के दौरान मऊ के पहाड़पुर मैदान में आयोजित एक जनसभा में अब्बास अंसारी ने सरकार बनने पर अधिकारियों को “ठीक से देख लेने” की धमकी दी थी। इस बयान को लेकर भारी विवाद हुआ था। इसके बाद तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर गंगाराम बिंद ने मऊ कोतवाली में एफआईआर दर्ज करवाई थी।
किन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा?
- धारा 506 (आपराधिक धमकी)
- धारा 171F (चुनाव में गलत प्रभाव डालना)
- धारा 186 (सरकारी कार्य में बाधा)
- धारा 189 (सरकारी सेवक को धमकाना)
- धारा 153A (समुदायों में वैमनस्य फैलाना)
- धारा 120B (आपराधिक साजिश)
इन सभी धाराओं में उन्हें दोषी करार दिया गया है।
आगे क्या होगा?
हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत अगर अब्बास अंसारी सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हैं और वहां से उन्हें राहत मिलती है, तो उनकी विधायकी स्वतः बहाल हो सकती है। लेकिन फिलहाल उन्हें सजा भुगतनी होगी और सदन की सदस्यता से हाथ धोना पड़ा है।
क्यों है यह मामला अहम?
अब्बास अंसारी न केवल मऊ सदर सीट से विधायक थे, बल्कि वे पूर्व बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के बेटे भी हैं। ऐसे में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों ही नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है।
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