ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन, अखिलेश यादव समेत कई नेता हिरासत में
Akhilesh Yadav Protest: दिल्ली में मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने प्रदर्शन किया। संसद के मकर द्वार से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर निकले विपक्षी सांसदों के मार्च को दिल्ली पुलिस ने बीच रास्ते में रोक दिया। इसके बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत सपा के सभी सांसदों और विपक्षी दलों के नेताओं को हिरासत में लिया गया।
विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर लोगों का भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
मार्च रोका तो सड़क पर बैठे विपक्षी सांसद
निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ रहे विपक्षी सांसदों को पुलिस ने आगे जाने से रोक दिया। इसके बाद सांसद सड़क पर बैठ गए और धरना दिया। इस दौरान केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारेबाजी भी हुई।
हिरासत में लिए जाने से पहले अखिलेश यादव ने कहा कि “जो लोग देश की खातिर लड़ते हैं, वे गिरफ्तारी से डरते नहीं हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग के बीच नजदीकी को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।
अखिलेश ने कहा कि देश का एकमत है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को त्यागपत्र देना चाहिए।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर भी अखिलेश का हमला
सपा अध्यक्ष ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के मुद्दे पर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने पर कथित धांधली की गुंजाइश बढ़ती है। उनके मुताबिक सत्ता पक्ष ऐसी व्यवस्था चाहता है, जिसमें एक ही बार चुनाव कराकर पूरी प्रक्रिया को अपने हिसाब से किया जा सके।
अखिलेश यादव ने इसे भाजपा की ‘चंडीगढ़ी चाल’ बताया। उन्होंने कहा कि घपला-घोटाला जितनी कम बार होगा, उसके पकड़े जाने की आशंका भी उतनी ही कम होगी।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की जगह ‘वन करप्शन, वन इलेक्शन’ कहना चाहिए।
विपक्ष ने कहा, चुनावी पारदर्शिता पर संघर्ष जारी रहेगा
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के पीछे केवल एक और बार चुनाव कराने की साजिश है। उन्होंने आशंका जताई कि इसके बाद देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश हो सकती है।
विपक्षी दलों ने साफ किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनावी पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही से जुड़े सवालों पर उनका संघर्ष जारी रहेगा।

