Malegaon Blast Case Verdict: ‘एक खबर को दबाने के लिए…’, मालेगांव ब्लास्ट के फैसले पर अखिलेश यादव ने दी प्रतिक्रिया

Sandesh Wahak Digital Desk: मालेगांव 2008 बम धमाके केस में मुंबई की विशेष एनआईए अदालत द्वारा सभी 7 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने इस फैसले पर अपनी प्रथम प्रतिक्रिया देते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं।

“एक बड़ी खबर को दबाने के लिए लाई गई दूसरी खबर?”

अखिलेश यादव ने संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा,

“दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, यही देश की आम जनभावना है। लेकिन क्या यह फैसला किसी बड़ी खबर को दबाने की रणनीति है? ऐसा तो नहीं कि एक खबर के शोर में दूसरी खबर को छुपाया जा रहा हो?”

उन्होंने फैसले पर सीधे तौर पर सवाल नहीं उठाया, लेकिन यह जरूर इशारा किया कि खबरों की टाइमिंग पर सवाल उठाना जरूरी है।

Malegaon Blast Case Verdict

अमेरिका और चीन का जिक्र, सरकार को चेताया

बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने अंतरराष्ट्रीय मामलों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, “मैंने पूरी रिपोर्ट नहीं पढ़ी है, लेकिन इतना ज़रूर कहूंगा कि इतनी बड़ी घटना में शामिल लोगों को सजा मिलनी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा,

“अमेरिका में भी बड़ी घटनाएं हुईं हैं। क्या यह खबर उन अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए लाई गई है?”

उन्होंने चीन को लेकर भी केंद्र सरकार को चेताया और कहा,

“चीन हमारी ज़मीन और व्यापार दोनों छीन रहा है। सरकार को इससे सावधान रहने की जरूरत है। पड़ोसी देश हमारी अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकता है।”

पृष्ठभूमि: मालेगांव ब्लास्ट केस

Malegaon Blast Case Verdict

2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 6 लोगों की मौत और 100 से अधिक घायल हुए थे।

17 साल लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 31 जुलाई 2025 को विशेष एनआईए अदालत ने सबूतों के अभाव में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित समेत सातों आरोपियों को बरी कर दिया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू

अखिलेश यादव की यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर सकती है। विपक्ष के अन्य नेता भी आने वाले दिनों में इस फैसले पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

मालेगांव केस के फैसले के बाद केंद्र सरकार पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर दबाव बढ़ने की संभावना है।

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