अमित शाह ने साबरमती से देश की पहली LNG ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

Sandesh Wahak Digital Desk: गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती रेलवे स्टेशन से रविवार को भारतीय रेल के एक नए युग का शुभारंभ हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश की पहली लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) से संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने इस पहल को पर्यावरण सुरक्षा और हरित ऊर्जा की ओर भारत का क्रांतिकारी कदम करार दिया।

बापू की सत्य-अहिंसा की भूमि से आधुनिक रेल का आगाज

समारोह को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि साबरमती केवल एक स्टेशन नहीं, बल्कि महात्मा गांधी की सत्य, आत्मशक्ति और सादगी के प्रयोगों की ऐतिहासिक भूमि है। इसी पावन धारा से बापू ने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ खादी और ग्रामीण स्वावलंबन की नींव रखी थी। आज उसी पवित्र क्षेत्र से रेलवे की सुरक्षा, सुविधा और पर्यावरण अनुकूलता से जुड़ी कई आधुनिक परियोजनाओं का आगाज हो रहा है।

साबरमती स्टेशन के कायाकल्प पर चर्चा करते हुए उन्होंने अतीत की यादें साझा कीं। अमित शाह ने कहा कि 1980 के दशक में जहाँ यात्रियों को ऑटो-रिक्शा पकड़ने के लिए भी दो किलोमीटर तक पैदल भटकना पड़ता था, वहीं आज यह एक अत्याधुनिक मल्टीमॉडल हब में बदल चुका है। यहाँ से मेट्रो, बस टर्मिनस और आगामी हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। उन्होंने बताया कि लगभग 1,472 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं से यात्रियों का सफर बेहद सुरक्षित और सुगम बनेगा।

मेक इन इंडिया से हाइड्रोजन ट्रेन तक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय रेल अब नए भारत की रफ्तार का प्रतीक बन चुकी है। प्रीमियम स्टेशनों, फ्रेट कॉरिडोर और रैपिड रेल के बाद अब हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल भारत को विश्व के गिने-चुने तकनीकी समृद्ध देशों की कतार में खड़ा करता है। उन्होंने गर्व जताया कि देश में निर्मित लोकोमोटिव्स में 94 प्रतिशत पार्ट्स ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बन रहे हैं, जिसे जल्द ही 100 प्रतिशत स्वदेशी करने का लक्ष्य है।

रेलवे की ढांचागत प्रगति पर बात करते हुए अमित शाह ने 1,200 हॉर्सपावर क्षमता वाले ‘डब्ल्यूएजी-12’ (WAG-12) ट्विन-सेक्शन इंजन की क्षमता का उल्लेख किया, जो अकेला ही 600 ट्रकों के बराबर माल ढोने में सक्षम है। इसके अलावा, डबल-डेकर मालगाड़ियों के सफल परीक्षण और दिल्ली-हावड़ा व दिल्ली-गुवाहाटी के 11,000 किलोमीटर लंबे रेल मार्गों को चार-लेन नेटवर्क में बदलने की योजनाओं पर भी तेजी से कार्य जारी है।

2030 तक ज़ीरो डीजल खपत का लक्ष्य

हरित क्रांति और ऊर्जा बचत के आंकड़ों को साझा करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि भारतीय रेल नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण (Electrification) पूरा हो चुका है, जो चीन, स्पेन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों की तुलना में एक बड़ी उपलब्धि है। वर्ष 2015-16 में जहाँ रेलवे 293 करोड़ लीटर डीजल का उपयोग करता था, वहीं 2024-25 में यह घटकर मात्र 108 करोड़ लीटर रह गया है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक रेलवे में डीजल की खपत को ‘जीरो’ करना है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार की भारी बचत होगी।

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