Balrampur News:18 बीघा जमीन और बैंक बैलेंस वाले समृद्ध परिवार का सब कुछ छिना, कोर्ट के आदेश पर 6 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

Balrampur News: बलरामपुर जनपद में एक परिवार का एक वक्त था जब इस घर में भविष्य की चिंता नहीं थी। परिवार के पास करीब 18 बीघा जमीन थी। बैंक खाते में लाखों रुपए थे। बच्चे शहर के नामी स्कूल में पढ़ते थे। इलाज, पढ़ाई और घर की जरूरतों के लिए परिवार के पास पर्याप्त साधन थे। मां-बाप को भरोसा था कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित है।

लेकिन कुछ साल में सब कुछ बदल गया। आज उसी परिवार के पास न वह जमीन बची है, न वह जमा पूंजी, जिसके सहारे बच्चों के भविष्य के सपने देखे गए थे। हालात इतने बिगड़े कि कभी नामी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाना पड़ रहा है। पति गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और पत्नी अपने तीन छोटे बच्चों को लेकर न्याय के लिए दर-दर भटक रही है।

यह कहानी है बलरामपुर की ज्योति पांडे और उनके परिवार की। ज्योति का आरोप है कि परिवार के करीबी और मुंहबोले भाई जैसे रिश्ते वाले व्यक्ति ने ठेकेदारी में साझेदारी का झांसा देकर उनके पति से करीब 55 लाख रुपए लिए। इसके बाद पति की बीमारी, कथित नशे और परिवार के भरोसे का फायदा उठाकर करीब 11 बीघा जमीन के दस्तावेज भी अपने पक्ष में करा लिए गए।

स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायत के बाद कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए परिवार ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। अब इस परिवार की उम्मीद पुलिस जांच और न्यायालय से है।

सात बीघा जमीन बेची, 63 लाख मिले… 55 लाख ठेकेदारी में लगाने का आरोप

ज्योति के अनुसार, परिवार ने करीब सात बीघा जमीन 63 लाख रुपए में बेची थी। यह रकम परिवार के लिए सिर्फ पैसा नहीं थी, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज और भविष्य का सहारा थी। आरोप है कि परिवार के करीबी लोगों को इस रकम की जानकारी थी। इसी दौरान उनके पति राहुल पांडे को ठेकेदारी के कारोबार में साझेदारी और निवेश का प्रस्ताव दिया गया। ज्योति का आरोप है कि अलग-अलग समय पर राहुल से करीब 55 लाख रुपए लिए गए। उन्हें बताया गया कि यह पैसा ठेकेदारी के काम में लगाया जाएगा और उसके बदले मुनाफा मिलेगा।

कुछ रकम संबंधित फर्म के खाते से राहुल के खाते में आने का भी दावा किया गया है। इससे परिवार को भरोसा होता रहा कि पैसा वास्तव में कारोबार में लगा है और उसका लाभ मिल रहा है। यही भरोसा आगे चलकर परिवार के लिए सबसे बड़ा नुकसान बन गया। ज्योति का कहना है कि उन्हें कभी यह अंदाजा नहीं हुआ कि जिस व्यक्ति को परिवार अपना समझकर आर्थिक मामलों में भरोसा कर रहा है, वही आगे चलकर उनकी संपत्ति को लेकर विवाद का कारण बन जाएगा।

18 बीघा जमीन और बैंक बैलेंस वाले समृद्ध परिवार का सब कुछ छिना

‘मुंहबोला भाई’ कहकर भरोसा जीता, उसी भरोसे पर परिवार ने सब कुछ सौंप दिया

ज्योति के मुताबिक, लक्ष्मीकांत मिश्रा से उनके परिवार के संबंध वर्षों पुराने थे। वह उन्हें अपना मुंहबोला भाई मानती थीं। रिश्ता इतना भरोसे वाला था कि आर्थिक लेनदेन में भी परिवार ने ज्यादा सवाल नहीं किए। ज्योति के मुताबिक, परिवार को यही लगता रहा कि भाई जैसा व्यक्ति है, कारोबार में मदद कर रहा है और पति के साथ साझेदारी में काम कर रहा है। लेकिन धीरे-धीरे परिवार की जमीन और पैसा दोनों हाथ से निकलते चले गए। आज ज्योति के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस रिश्ते को उन्होंने खून के रिश्ते जैसा माना, उसी पर भरोसा करना उनके परिवार के लिए इतना भारी कैसे पड़ गया।

आरोप- पति को शराब की आदत लगवाई, नशे की हालत में जमीन के दस्तावेज कराने का सिलसिला शुरू हुआ

ज्योति ने शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके पति राहुल पांडे पहले शराब नहीं पीते थे। विपक्षी पक्ष के संपर्क में आने के बाद उन्हें शराब की आदत लग गई। पीड़िता का आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर जमीन से जुड़े दस्तावेज तैयार कराए गए। शिकायत के अनुसार, 14 सितंबर 2021 को ठेकेदारी में हिस्सेदारी और पार्टनरशिप डीड की बात कहकर करीब एक बीघा जमीन से संबंधित दस्तावेज तैयार कराया गया।

इसके बाद 5 अक्टूबर 2021 को बड़े प्रोजेक्ट और साझेदारी में काम दिलाने की बात कहकर शेष करीब 10 बीघा जमीन से संबंधित दस्तावेज कराए जाने का आरोप है। ज्योति का कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को यह बताया गया कि दस्तावेज साझेदारी और निवेश से संबंधित हैं, जबकि बाद में जमीन की बिक्री से जुड़े दस्तावेज होने की जानकारी सामने आई। शिकायत में यह भी आरोप है कि दस्तावेजों में मोबाइल नंबर तक आरोपियों के डाले गए, ताकि जमीन से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी पीड़ित परिवार तक न पहुंच सके।

चार दिन पहले अस्पताल से लौटे थे पति, फिर उपनिबंधक कार्यालय ले जाने का आरोप

इस मामले का सबसे गंभीर आरोप 4 फरवरी 2025 की घटना को लेकर है।ज्योति के मुताबिक, उनके पति राहुल पांडे लीवर की बीमारी से पीड़ित हैं और दिल्ली के महाराजा अग्रसेन अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। वह बताती हैं कि घटना से करीब चार दिन पहले ही राहुल को अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर घर लाई थीं। शरीर कमजोर था और स्वास्थ्य ठीक नहीं था। इसी दौरान उन्हें पार्टनरशिप डीड कैंसिल कराने की बात कहकर उपनिबंधक कार्यालय ले जाने का आरोप है। ज्योति का कहना है कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि जमीन से जुड़ा कोई बड़ा दस्तावेज कराया जा रहा है। आरोप है कि इसी दौरान पहले किए गए कथित बिक्री अनुबंध के आधार पर करीब 11 बीघा जमीन का बैनामा करा लिया गया।

सरकारी मालियत 77.11 लाख बताई गई, दस्तावेज में 11.44 लाख का भुगतान दर्ज होने का दावा

पीड़िता के अनुसार, करीब 11 बीघा जमीन की सरकारी मालियत लगभग 77.11 लाख रुपए थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दस्तावेज में करीब 11.44 लाख रुपए बैंक के माध्यम से भुगतान किए जाने का विवरण दर्ज किया गया। ज्योति का दावा है कि यह रकम भी बाद में वापस ले ली गई। अब परिवार पुलिस जांच में इन सभी बैंक खातों और लेनदेन की जांच की मांग कर रहा है।परिवार का कहना है कि यदि बैंक रिकॉर्ड, जमीन के दस्तावेज, पार्टनरशिप डीड और बिक्री अनुबंध की जांच निष्पक्ष तरीके से हो तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

18 बीघा जमीन और बैंक बैलेंस वाले समृद्ध परिवार का सब कुछ छिना

13 दिसंबर 2025: जमीन पर कब्जे की खबर मिली, विरोध करने पहुंचीं तो मारपीट का आरोप

ज्योति के मुताबिक, 13 दिसंबर 2025 को गांव के लोगों ने उन्हें सूचना दी कि विपक्षी पक्ष उनकी जमीन पर कब्जा करने पहुंचा है। वह मौके पर पहुंचीं। इसके बाद विवाद हो गया। ज्योति ने शिकायत में आरोप लगाया कि उनके साथ गाली-गलौज की गई। विरोध करने पर मारपीट की गई। एक आरोपी द्वारा उन्हें जमीन पर गिराकर लात-मुक्कों से पीटने का भी आरोप लगाया गया है।ज्योति के अनुसार, गांव के लोगों के पहुंचने के बाद आरोपी वहां से चले गए। शिकायत में धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। इसके बाद से परिवार के भीतर डर और तनाव का माहौल बना हुआ है।

छह बार शिकायत… फिर भी सुनवाई नहीं होने का आरोप

ज्योति का कहना है कि उन्होंने दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच कई बार पुलिस और अधिकारियों से शिकायत की। उनके अनुसार करीब छह बार स्थानीय स्तर पर शिकायत की गई। इसके बाद उच्चाधिकारियों को भी पंजीकृत डाक के माध्यम से शिकायत भेजी गई। लेकिन अपेक्षित कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए आखिरकार परिवार ने न्यायालय की शरण ली।

न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने अब छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।मुकदमे में अजीत मिश्रा पुत्र कैलाशनाथ मिश्रा निवासी सिविल लाइन बलरामपुर, लक्ष्मीकांत मिश्रा पुत्र गोविंद शरण निवासी मेवालाल तालाब बलरामपुर, विजय मिश्रा पुत्र शारदा प्रसाद निवासी लवकुश नगर कासगंज, आनंद मिश्रा पुत्र जनार्दन प्रसाद निवासी खजुरिया थाना गौरा चौराहा, दिलीप कुमार पुत्र शिव प्रकाश निवासी नेवलगढ़ थाना तुलसीपुर और वेद प्रकाश पुत्र श्यामाल निवासी सिसई थाना कोतवाली देहात को आरोपी बनाया गया है।

सबसे ज्यादा दर्द बच्चों की पढ़ाई का, फातिमा स्कूल से प्राथमिक विद्यालय तक पहुंची जिंदगी

इस पूरे मामले में ज्योति के लिए सबसे ज्यादा पीड़ा जमीन या पैसे के चले जाने की नहीं, बल्कि अपने बच्चों का भविष्य बदल जाने की है। उनके तीन बच्चे हैं। एक बेटी करीब सात वर्ष की है। एक बेटा करीब 11 वर्ष का और दूसरा करीब छह वर्ष का बताया गया है। ज्योति के मुताबिक, तीनों बच्चे पहले बलरामपुर के फातिमा स्कूल में पढ़ते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी थी। बच्चों की पढ़ाई को लेकर कभी यह नहीं सोचा था कि फीस कैसे जमा होगी। बच्चों के सपने थे, उन्हें अच्छे स्कूल में पढ़ाने की इच्छा थी। लेकिन जमीन और जमा पूंजी खत्म होने के बाद घर की आर्थिक स्थिति ऐसी बदली कि बच्चों को स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा। एक मां के लिए इससे बड़ा दर्द शायद कुछ नहीं होता। जिस बच्चे की फीस समय पर जमा करने की चिंता भी कभी नहीं हुई, उसी बच्चे की किताब-कॉपी और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना आज चुनौती बन गया है।

‘पहले भविष्य की चिंता नहीं थी, अब हर दिन डर में गुजरता है’

ज्योति के मुताबिक, पहले परिवार के पास जमीन थी, पैसा था और पति काम करते थे। घर में बच्चों की पढ़ाई की बात होती थी। भविष्य की योजनाएं बनती थीं। आज पति बीमार हैं। इलाज का खर्च है। तीन छोटे बच्चों की जिम्मेदारी है। घर चलाने का संकट है और ऊपर से जमीन तथा रकम वापस पाने की लड़ाई। वह कहती हैं कि आर्थिक संकट ने परिवार की पूरी जिंदगी बदल दी। अब उनके सामने सिर्फ आज का खर्च नहीं, बल्कि बच्चों का भविष्य भी है। पति बीमारी से जूझ रहे, पत्नी के कंधों पर तीन बच्चों का बोझराहुल पांडे लीवर की बीमारी से जूझ रहे हैं। उनका इलाज चल रहा है।

एक तरफ बीमारी का खर्च, दूसरी तरफ बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतें। इन सबके बीच जमीन और रकम से जुड़े विवाद ने परिवार को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से तोड़ दिया है। ज्योति के लिए लड़ाई सिर्फ संपत्ति की नहीं है।वह कहती हैं कि अगर जमीन और पैसा वापस नहीं मिला तो बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा, यह सबसे बड़ा सवाल है।एक मां अपने बच्चों को वह जिंदगी देना चाहती है जो कुछ साल पहले तक उनके पास थी।

‘जिसे भाई माना, उसी पर भरोसा करना भारी पड़ गया’

ज्योति कहती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें अपने ही परिचित लोगों के खिलाफ न्यायालय जाना पड़ेगा। पीड़िता ज्योति बताती है कि “हमने जिन लोगों को अपना समझा, उन्हीं पर भरोसा किया। कभी नहीं सोचा था कि एक दिन अपनी ही जमीन और पैसा वापस पाने के लिए कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ेंगे। मेरे पति बीमार हैं। तीन छोटे बच्चे हैं। आज न जमीन बची है और न वह पैसा, जिसके भरोसे हमने बच्चों का भविष्य सोचा था।” उनकी आवाज में शिकायत के साथ बेबसी भी साफ दिखाई देती है। वह कहती हैं कि उन्हें अब किसी बदले की जरूरत नहीं है। वह सिर्फ अपना हक वापस चाहती हैं।

अब दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड खोलेंगे पूरे मामले की परतें

न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बाद अब पुलिस जांच इस मामले की दिशा तय करेगी। जमीन से संबंधित दस्तावेज, कथित पार्टनरशिप डीड, बिक्री अनुबंध, बैनामा, बैंक खातों में हुए लेनदेन, मोबाइल नंबर और दस्तावेज तैयार किए जाने की परिस्थितियां जांच का अहम हिस्सा हो सकती हैं। जांच में यह सामने आना बाकी है कि जमीन के दस्तावेज किन परिस्थितियों में तैयार हुए, दस्तावेजों में दर्ज रकम का वास्तविक भुगतान हुआ या नहीं, कथित पार्टनरशिप का वास्तविक स्वरूप क्या था और पीड़िता द्वारा लगाए गए धोखाधड़ी तथा दस्तावेजों में हेरफेर के आरोप कितने सही हैं।फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

एक मां की आखिरी उम्मीद, ‘बच्चों का भविष्य वापस मिल जाए’

कभी इस परिवार के पास करीब 18 बीघा जमीन थी। फिर सात बीघा जमीन बेचकर 63 लाख रुपए मिले। बच्चों के लिए अच्छे स्कूल चुने गए।भविष्य के सपने देखे गए।लेकिन आज वही परिवार अपनी जमीन और रकम वापस पाने के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। ज्योति के पति बीमारी से जूझ रहे हैं। तीन छोटे बच्चे मां का चेहरा देखकर अपना भविष्य तलाश रहे हैं। एक समय था जब इस घर में बच्चों की स्कूल बस आती थी। आज बच्चों की पढ़ाई सरकारी प्राथमिक विद्यालय में हो रही है। एक समय था जब परिवार के पास भविष्य सुरक्षित करने के लिए जमीन और पैसा दोनों थे। आज परिवार को अपने अधिकार के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। ज्योति की लड़ाई सिर्फ 11 बीघा जमीन और 55 लाख रुपए की नहीं है। उनकी लड़ाई उस जिंदगी को वापस पाने की है, जिसमें उनके बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ते थे, पति बीमारी के बावजूद इलाज करा सकते थे और परिवार को कल की चिंता नहीं होती थी। अब इस परिवार की नजर पुलिस जांच और न्यायालय पर है। उम्मीद है कि दस्तावेजों और लेनदेन की जांच से सच सामने आएगा और शायद इसी सच के साथ एक मां के बच्चों की जिंदगी भी फिर से पटरी पर लौट सकेगी।

रिपोर्ट- योगेंद्र त्रिपाठी

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