Ahmedabad Plane Crash: पीड़ित परिवार की अपील, बस हमारे परिजनों के अंग सही-सलामत सौंप दीजिए

Ahmedabad Plane Crash: अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे ने न जाने कितने घरों को सूना कर दिया। लेकिन सबसे ज्यादा मार उन परिवारों पर पड़ी, जिन्होंने अपने अपनों को कभी लौटकर न देखने के लिए एयरपोर्ट छोड़ा था। ऐसा ही एक परिवार है गुजरात के खेड़ा जिले के पवार परिवार का, जिन्होंने इस हादसे में अपने माता-पिता महादेव तुकाराम पवार और उनकी पत्नी आशाबेन पवार को खो दिया। यह उनकी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा थी, और दुर्भाग्य से आख़िरी भी।

जय भारत कहकर विदा हुए थे माता-पिता

ब्रिटेन में रहने वाले बेटे रमेश पवार की आंखें आज भी उस आखिरी कॉल की याद में नम हो जाती हैं। उन्होंने बताया, मां-बाप पहली बार विदेश जा रहे थे। एयरपोर्ट से वीडियो कॉल किया था, खुश थे कि उन्हें सीट मिल गई है। उन्होंने कहा, हम सही जगह बैठे हैं… जय भारत, और फोन कट गया। अब सोचता हूं, काश वो कॉल कुछ मिनट और चलता। रमेश बताते हैं कि उनके माता-पिता धार्मिक प्रवृत्ति के थे, और पिछले 10 सालों से नियमित मंदिर सेवा करते आ रहे थे।

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हादसे की खबर के बाद मचा कोहराम

पवार परिवार के एक और सदस्य महेश ने भावुक होते हुए बताया कि वो खुद चाचा-चाची को एयरपोर्ट छोड़ने गए थे। कुछ घंटों बाद जब हादसे की खबर आई, तो बार-बार फोन मिलाया, रिंग तो हुई लेकिन किसी ने उठाया नहीं। हम समझ गए कुछ गड़बड़ है और तुरंत अहमदाबाद निकल पड़े। एयरपोर्ट और असरवा अस्पताल के चक्कर काटते हुए महेश ने बताया कि भीड़, अफरातफरी और असमंजस का माहौल था। रात में डीएनए सैंपल लिया गया, लेकिन हमें कुछ स्पष्ट नहीं बताया गया।

सरकार से भावनात्मक अपील

महेश ने सरकार से मार्मिक अपील करते हुए कहा, अगर ज़रूरत हो तो 72 घंटे नहीं, 96 घंटे लीजिए। बस हमारे परिजनों के शरीर के अंगों को सम्मान के साथ हमें सौंपिए। ये सिर्फ हमारी मांग नहीं, हर उस परिवार की है जिसने अपनों को खोया है। हम भावनाओं से जुड़े हैं, कृपया इन्हें समझा जाए।

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