आयुष विभाग: जिलों में अस्पताल मौजूद नहीं, अफसरों ने कर डाली डॉक्टरों की तैनाती
खबर छपने पर आनन-फानन में शुद्धि पत्र जारी, तबादला आदेशों का संशोधन-निरस्तीकरण, रसूखदारों पर दरियादिली कायम
Sandesh Wahak Digital Desk: बुलंदी देर तक किस शख्स के हिस्से में रहती है, बहुत ऊंची इमारत हर घड़ी खतरे में रहती है। मुनव्वर राणा की इन पंक्तियों पर आयुष विभाग के वो बड़े अफसर सटीक बैठते हैं। जिन्होंने तबादलों में बड़े पैमाने पर गड़बडिय़ों की कलंक कथा लिखी है।

अफसर जानते हैं, जांच कराने पर गर्दन फंसनी तय है। मानव सम्पदा पोर्टल से ऑनलाइन तबादले न करके ऑफलाइन करने से गड़बडिय़ों की संख्या बढ़ी है। इसलिए अपनी कारगुजारियां छिपाने के लिए अफसरों ने तत्काल शुद्धि पत्र जारी करके कई डॉक्टरों की तैनातियों में संशोधन किया। हालांकि अभी तक उन रसूखदार डॉक्टरों का बाल बांका नहीं बिगड़ा, जिनकी तैनाती को करीब डेढ़ दशक हो चुका है। फिर भी उन्हें तबादला नीति के दायरे में सिर्फ इसलिए नहीं लाया गया क्योंकि विभागीय मंत्री के कृपापात्र हैं। दाम्पत्य नीति से दूर रखे गए डॉक्टरों का दर्द भी सुनने वाला कोई नहीं है।

‘संदेश वाहक’ में गुरुवार को खबर प्रकाशित होने के बाद महानिदेशक आयुष मानवेन्द्र सिंह की तरफ से एक आदेश शुद्धि पत्र के तौर पर 20 से ज्यादा डॉक्टरों के लिए निकाला गया। इनमें कई डॉक्टरों के नाम गुरुवार को संदेशवाहक ने प्रकाशित किये थे।
ख़ास बात ये है कि जिले में उस नाम का अस्पताल न होते हुए भी पोस्टिंग की गयी। अस्पतालों के नाम बलिया में सयालपुर, जसोदा/मथुरा, बदौरा/जालौन, हैदरपुर/कानपुर हैं। जो अस्तित्व में नहीं हैं। इसी तरह डॉक्टर आरती, शिवकरन वर्मा और आशा देवी को आवंटित दो-दो तैनाती स्थल निरस्त किये गए हैं। विकासनगर लखनऊ में एक सीट होने के बावजूद भेजे गए दूसरे डॉक्टर अरविन्द गोस्वामी का तबादला भी निरस्त हुआ है।

कुछ डॉक्टरों का आदेश निरस्त
डॉ अखिलेश वर्मा, डॉ रेनू कुमारी, डॉ निशा मिश्रा, डॉ अरविन्द कुमार, डॉ दिव्यांशु रस्तोगी, डॉ रण विजय सिंह और सौरभ साहू को भी आवंटित स्थल रिक्त न होने के चलते भेजा गया। इनमें से कुछ डॉक्टरों का आदेश निरस्त और कुछ का संशोधित करके नई तैनातियां जारी की गयी हैं। कचनारा/बरेली में सीट नहीं होने के बावजूद भेजी गयी डॉक्टर प्रीति गुप्ता का तबादला भी निरस्त हुआ है। वहीं डॉक्टर जितेंद्र कुमार और अरुण कुमार को भी एक साथ दिबियापुर/औरैया भेजा गया। जिसमें से डॉ जितेंद्र को संशोधन करते हुए हैदरपुर/औरैया आवंटित किया गया।
सिर्फ यही नहीं लखनऊ में 16 वर्षों से तैनात विभागीय मंत्री के कृपा पात्र डॉ राजकुमार यादव को नहीं हटाने के पीछे अफसरों का तर्क है कि उनका प्रमोशन जल्द ही क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी की नियमित तैनाती पर होने जा रहा है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के पद पर प्रमोशन पाने वालों की सूची में डॉ तृप्ति आर सिंह समेत दर्जन भर डॉक्टर बताये जा रहे हैं। जिनको शासन में डीपीसी के बाद क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी की नियमित तैनाती पर अलग अलग जिलों में भेजा जाएगा। हालांकि जिस अंदाज में राजकुमार यादव की ठसक लखनऊ में कार्यवाहक के तौर पर बरकरार है। उन्हें लखनऊ में ही नियमित तैनाती मिलने का पूरा अंदेशा है।

20 फीसदी की सीमा का लक्ष्य मानकर हटाया : आयुष मंत्री
आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु से ‘संदेश वाहक’ ने पूछा कि ऐसे डॉक्टरों को क्यों नहीं हटाया, जिनको 15 वर्ष एक जिले में हो चुके हैं तो उन्होंने कहा कि तबादलों की सीमा 20 फीसदी है। यही लक्ष्य मानकर हटाया गया है। अभी 13 साल तक तैनाती वाले डॉक्टरों को तबादलों के जरिये हटाया गया है। जिनकी शिकायत थी। उन्हें भी हटाया है। योग दिवस के कारण होम्योपैथिक विभाग में तबादले रोके गए हैं।

राजभवन व हाईकोर्ट प्रशासन से नहीं मिली एनओसी
लखनऊ में 2011 से तैनात डॉ अमिता वर्मा फिलहाल कुछ माह से राजभवन में तैनात हैं। अफसरों के मुताबिक विभाग के पत्र के बावजूद राजभवन ने उन्हें हटाने के लिए एनओसी नहीं दी है। 2009 से लखनऊ में डॉ त्रिभुवन यादव और 2014 से डॉ लक्ष्मी बरकरार हैं। दोनों की तैनाती हाईकोर्ट में है। पिछली बार डॉ यादव का ट्रांसफर हुआ। लेकिन हाईकोर्ट प्रशासन के अफसरों ने रुकवा दिया था। इस बार भी दोनों के लिए हाईकोर्ट प्रशासन से एनओसी नहीं दी गयी। लक्ष्मी की मूल तैनाती लखनऊ में कनार पर है। सवाल लाख टके का है कि जिन संवैधानिक संस्थानों को इस मामले में आदर्श स्थापित करना चाहिए। वहां से भी एनओसी आयुष विभाग को नहीं दी जा रही है।
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