आजमगढ़ शिक्षक भर्ती घोटाला: 22 फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति मामले में तत्कालीन वरिष्ठ सहायक पर FIR
वर्ष 2015 में आजमगढ़ मंडल में माध्यमिक विद्यालयों में मेरिट के आधार पर हुई थी 252 सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां
Sandesh Wahak Digital Desk: आजमगढ़ मंडल में वर्ष 2015 में माध्यमिक शिक्षा राजकीय विद्यालयों में मेरिट के आधार पर हुई सहायक अध्यापकों की नियुक्ति में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच के बाद संयुक्त शिक्षा निदेशक (JD) नवल किशोर ने इस मामले में जेडी कार्यालय में कार्यरत तत्कालीन वरिष्ठ सहायक मनीष कुमार के खिलाफ कोतवाली थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2014 में संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय से विभिन्न विषयों के लिए 340 पदों पर सहायक अध्यापक की नियुक्तियां निकाली गई थीं, जिसमें से 2015-16 में 252 शिक्षकों की नियुक्तियां हुईं। मंडल स्तर पर हुई जांच में कुल 22 शिक्षकों की मार्कशीट और प्रमाण पत्र फर्जी और कूटरचित पाए गए हैं। इन 22 फर्जी शिक्षकों में से वर्तमान समय में आजमगढ़ मंडल में 8 शिक्षक (आजमगढ़ में 3, मऊ में 3 और बलिया में 2) अभी भी पदस्थापित हैं, जबकि शेष ने अपना स्थानांतरण अन्य जनपदों में करा लिया है।
शासन के निर्देश पर फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी पाने वाले इन सभी शिक्षकों की सेवा समाप्त करते हुए वेतन रिकवरी और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश जारी किया गया है। 22 में से 14 शिक्षकों ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है, जो फिलहाल विचाराधीन है।
तत्कालीन वरिष्ठ सहायक पर FIR क्यों?
संयुक्त शिक्षा निदेशक नवल किशोर ने अपनी तहरीर में तत्कालीन वरिष्ठ सहायक मनीष कुमार को फर्जीवाड़े में संलिप्त बताया है। जेडी ने बताया कि वर्ष 2015-16 में जब नियुक्तियों की तीन चयन सूचियाँ जारी हुईं, तब संयुक्त निदेशक (जेडी) पद पर अधिकारी बदलते रहे, लेकिन वरिष्ठ सहायक के पद पर मनीष कुमार (और संजय सिंह) लगातार बने रहे और चयन प्रक्रिया व दस्तावेज जमा करने में इनकी मुख्य भूमिका थी।
वर्तमान जेडी नवल किशोर ने बताया कि उन्होंने मनीष कुमार से उस समय के नियुक्ति संबंधी अभिलेख मांगे, लेकिन उन्होंने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। जेडी ने आरोप लगाया कि समय पर अभिलेख प्रस्तुत नहीं करना उनकी फर्जीवाड़े में संलिप्तता की पुष्टि करता है।
मनीष कुमार वर्तमान में भी जेडी कार्यालय आजमगढ़ में प्रशासनिक पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। पुलिस ने अब मनीष कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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