CJI ने सरकार से की सख्त टिप्पणी, ED पार कर रही है सारी हदें
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के सरकारी शराब रिटेल निगम TASMAC के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति भूषण रामाकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान ईडी की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ईडी ने सारी हदें पार कर दी हैं।
क्या है मामला
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2014 से 2021 के बीच उसने खुद TASMAC अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ 41 एफआईआर दर्ज की हैं। इन एफआईआर में शराब बिक्री लाइसेंस में अनियमितता और भ्रष्टाचार जैसे आरोप शामिल हैं। राज्य सरकार की जांच पहले से चल रही थी, लेकिन इसी बीच ईडी ने अपनी तरफ से केस दर्ज कर निगम के मुख्यालय पर छापा मार दिया।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी
पीठ ने जब यह सुना कि ईडी ने पूरे निगम को आरोपी बना दिया है, तो चीफ जस्टिस गवई ने कहा, आपने पूरी संस्था को ही आरोपी बना दिया? यह संघीय व्यवस्था का उल्लंघन है। ईडी अपनी सीमाएं लांघ रही है। जब राज्य जांच कर रहा है, तो केंद्र की एजेंसी का यह दखल क्यों?
फोन क्लोनिंग और निजता का मुद्दा
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी, जो राज्य सरकार और TASMAC की ओर से पेश हुए, उन्होंने कोर्ट को बताया कि ईडी ने छापे के दौरान कर्मचारियों से दुर्व्यवहार किया। सभी कर्मचारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए और उनका डेटा क्लोन कर लिया गया। यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
क्या है ED का पक्ष
ED की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि यह मामला 1000 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। ईडी के पास कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं। लेकिन कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल ED की कार्रवाई को स्थगित कर रहा है और दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
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