UP Corruption : इंस्पेक्टर-सीओ सौ करोड़ के मालिक, आईपीएस की हैसियत कितनी?

Sandesh Wahak Digital Desk/ Manish Srivastava: सीएम योगी अक्सर कहते हैं कि दागी पुलिसकर्मियों की सम्पत्तियां जब्त की जाएंगी। कितनों की जब्त हुई, इस सवाल पर अफसर बगले झांकने लगते हैं। एक दिन पहले सीओ ऋषिकांत शुक्ला 100 करोड़ की संपत्ति बनाने पर निलंबित हुए हैं।

ऋषिकांत शुक्ला और नरगिस खान

ऋषिकांत शुक्ला व नरगिस खान जैसों की लंबी फेहरिस्त

चंद माह पहले महिला इंस्पेक्टर नरगिस खान भी सौ करोड़ की मालकिन बनने पर आय से अधिक सम्पत्ति के केस में घिरी थीं। यूपी पुलिस के जिन अफसरों-कर्मियों को अपराधियों की सम्पत्तियां जब्त करते-करते खुद को भी धनकुबेर बनाने के शौक ने जकड़ा है। उनकी फेहरिस्त में इजाफा खाकी के इस्तकबाल पर ग्रहण के समान है। आईपीएस की आर्थिक हैसियत का अंदाजा लगाना तो मानो भूसे में से सुई ढूंढने जितना मुश्किल है। पुलिसकर्मी अब अपराध जगत का हिस्सा बनकर सैकड़ों करोड़ में खेलने लगे हैं।

कई आईपीएस पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगे। अधिकांश को क्लीनचिट से नवाजा गया। नतीजतन जूनियर अफसरों की हिम्मत बढऩा तय थी। इसी का परिणाम आईपीएस अनिरुद्ध सिंह द्वारा रेपकांड में फंसे स्कूल संचालक से 20 लाख की घूस मांगना था। सबसे अहम प्रकरण तो प्रयागराज में एसएसपी रहते थाने-चौकी बेचने के गंभीर आरोपों से घिरे आईपीएस अभिषेक दीक्षित का है। जिन्हे सीएम ने निलंबित किया। अफसरों ने डेढ़ वर्ष बाद जांच में क्लीनचिट देकर ससम्मान मूल कैडर तमिलनाडु लौटा दिया।

पूर्व में भी लगे भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप

जबकि तमिलनाडु में भी इस आईपीएस पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप पहले से लगे थे। ऐसे पूर्व डीजीपी भी हैं। जिनकी सम्पत्तियों का कुनबा खुद अफसरों के बीच चर्चा का विषय बनता है। प्रदेश में विवादित सम्पत्तियां, जमीनों का खेल, खनन सिंडिकेट, अपराधियों को बचाने समेत तमाम ऐसे हथकंडे दागी पुलिसकर्मियों ने आजमाए, जिनसे सम्पत्तियों की बेल लम्बी होती चली गयी। महोबा में वसूली सिंडिकेट चलाने के आरोपी पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार जैसे दागी आईपीएस को सरकार ने बर्खास्तगी के मुकाम तक तो जरूर पहुंचाया, आय से अधिक सम्पत्ति का फंदा नहीं कसने से सवाल भी खड़े हुए। अंसल की मायावी टाउनशिप सुशांत गोल्फ सिटी में तमाम आईपीएस के लग्जरी आशियानों की भरमार है।

‘संदेश वाहक’ की टीम को टाउनशिप की सबसे मंहगी लोकेशन पर कई आईपीएस अफसरों की आवासीय सम्पत्तियां नजर आयीं। कुछ में निर्माण भी जारी था। करोड़ों की इन सम्पत्तियों को कैसे खरीदा गया है, ये जांचने की फुर्सत किसी भी एजेंसी के पास नहीं है। जिम्मेदार तो बस आईपीआर में दिखाया सम्पत्तियों का ब्योरा ही सबसे बड़ा सत्य मानते हैं। बलिया समेत कई शहरों में बड़े वसूली काण्ड सामने आये, एक भी आईपीएस की जवाबदेही नहीं तय की गयी।

 

क्राइम के जरिये सम्पत्तियां बना रहे पुलिसकर्मी, आईपीएस की हिस्सेदारी: सुलखान सिंह

पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के मुताबिक पुलिसकर्मी अब अपराध में तेजी से घुस रहे हैं। सिर्फ बेईमानी से इतना पैसा नहीं आ सकता है। क्राइम के जरिये सम्पत्तियां बनाई जा रही हैं। आईपीएस की क्राइम में पूरी हिस्सेदारी है। पुलिसकर्मियों को आईपीएस का सक्रिय समर्थन है। दागी कर्मियों को नेताओं, वरिष्ठ आईएएस-आईपीएस का खुला संरक्षण है। ठेका-पट्टा, टेंडर, ट्रांसपोर्ट, बिल्डिंग से जुड़े कई क्राइम में पुलिसकर्मी सीधे इन्वॉल्व हो रहे हैं। लम्बे समय तक एक ही जिले-मंडल में तैनाती करप्शन का बड़ा कारण है। क्रिमिनलिटी का लिंक बनता है। आर्थिक गतिविधियों का मजबूत रिश्ता इससे बनता है। एजेंसियों/यूनिट्स में लम्बे समय तक तैनाती भी भ्रष्टाचार को पूरी तरह से बढ़ावा देना है।

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