रोजाना 10 हजार कदम चलना घुटनों के लिए सही या नुकसानदायक? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
Walking Benefits and Knee Pain: नियमित वॉकिंग सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन अचानक कदमों की संख्या बढ़ाने और ज्यादा वजन के कारण घुटनों पर दबाव बढ़ सकता है।
वॉकिंग को फिट रहने का सबसे आसान और कम जोखिम वाला तरीका माना जाता है। इससे दिल की सेहत बेहतर रखने, शरीर की सक्रियता बढ़ाने और चलने-फिरने की क्षमता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन क्या रोजाना बहुत ज्यादा चलने से घुटनों को नुकसान पहुंच सकता है? इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं है।
वॉकिंग का असर उम्र, शरीर के वजन, मांसपेशियों की ताकत, घुटनों की मौजूदा स्थिति, जूतों और चलने की जगह पर निर्भर करता है। खासकर लंबे समय तक कम सक्रिय रहने के बाद अचानक ज्यादा चलना घुटनों में दर्द और परेशानी की वजह बन सकता है।
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क्या ज्यादा वॉकिंग से घुटनों को नुकसान होता है?
आमतौर पर वॉकिंग को घुटनों के नुकसान का सीधा कारण नहीं माना जाता। हालांकि, जरूरत से ज्यादा चलने या शरीर की क्षमता से अधिक दबाव पड़ने पर घुटनों के आसपास दर्द और असहजता हो सकती है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) में प्रकाशित शोध के अनुसार, अधिक उपयोग से इलियोटिबियल बैंड (IT Band) सिंड्रोम जैसी समस्या बढ़ सकती है। घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस से जूझ रहे लोगों में भी लक्षण बिगड़ने की आशंका हो सकती है।
यदि कोई व्यक्ति रोजाना केवल 2,000 से 3,000 कदम चलता है और अचानक 10,000 से 15,000 कदम चलना शुरू कर देता है, तो शरीर पर पड़ने वाला कुल भार काफी बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में मांसपेशियों, टेंडन और जोड़ों को नए स्तर की गतिविधि के अनुरूप ढलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
इसके कारण घुटनों में दर्द, अकड़न और असहजता महसूस हो सकती है। हालांकि, हर बार दर्द होने का मतलब यह नहीं है कि घुटने का कार्टिलेज खराब हो रहा है। कई बार यह शरीर पर अचानक बढ़े भार को सहन न कर पाने का संकेत भी हो सकता है।
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हर कदम पर घुटनों पर कितना दबाव पड़ता है?
चलते समय घुटने शरीर के वजन को संभालते हैं। हर कदम पर जोड़ों के भीतर बल पैदा होता है। NCBI में बताई गई एक स्टडी में विशेष उपकरणों से लैस घुटने के इम्प्लांट की मदद से रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान जोड़ों पर पड़ने वाले बल को मापा गया।
इस अध्ययन में सामान्य समतल जमीन पर चलने के दौरान घुटने पर लगने वाला अधिकतम परिणामी बल औसतन शरीर के वजन का करीब 261 प्रतिशत पाया गया। सीढ़ियां चढ़ने और उतरने के दौरान घुटनों पर भार इससे भी अधिक था।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर कदम घुटनों को नुकसान पहुंचाता है। मांसपेशियां, कार्टिलेज, टेंडन और दूसरे ऊतक इस बल को सहने और बांटने में मदद करते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि मांसपेशियों को मजबूत रखने और घुटनों की गतिशीलता बनाए रखने में सहायक हो सकती है।
NCBI में प्रकाशित ऑस्टियोआर्थराइटिस से जुड़े शोध की समीक्षा में भी पाया गया कि चलने से संबंधित कुछ जैव-यांत्रिक बदलाव सीमित थे। शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष नहीं निकाला कि चलने से जुड़े सभी बदलाव जोड़ों की सेहत के लिए नुकसानदायक हैं।
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ज्यादा वजन से घुटनों पर बढ़ता है दबाव
जॉन्स हॉपकिन्स के अनुसार, हर कदम पर घुटनों के जोड़ों पर शरीर के वजन से करीब तीन से छह गुना तक दबाव पड़ सकता है। इसके मुताबिक, शरीर का वजन 10 पाउंड बढ़ने पर हर कदम के साथ घुटनों पर लगभग 60 पाउंड अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
अधिक वजन के कारण घुटनों पर लगातार ज्यादा यांत्रिक दबाव पड़ सकता है। इससे जोड़ों के बीच मौजूद सुरक्षा देने वाले कार्टिलेज के खराब होने का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, शरीर में अतिरिक्त फैट सक्रिय ऊतक की तरह काम करता है और सूजन बढ़ाने वाले रसायन छोड़ सकता है। ये रसायन जोड़ों के कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाने वाली प्रक्रिया में योगदान दे सकते हैं।
इसलिए घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए केवल कदमों की संख्या पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। शरीर के वजन और मांसपेशियों की ताकत को बनाए रखना भी जरूरी है।
घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
वॉकिंग आमतौर पर घुटनों की दुश्मन नहीं है। सही तरीके से और अपनी क्षमता के अनुसार की गई नियमित वॉकिंग फिटनेस, गतिशीलता और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है।
अगर आप रोजाना चलने की आदत शुरू कर रहे हैं, तो दूरी और समय धीरे-धीरे बढ़ाएं। अचानक कदमों की संख्या कई गुना बढ़ाने से बचें। आरामदायक जूते पहनें और अपनी मांसपेशियों को मजबूत बनाने पर भी ध्यान दें।
यदि पहले से घुटनों की समस्या है, तो अपनी गतिविधि उसी के अनुसार तय करें। लगातार दर्द या सूजन को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।

