Health tips: सहजन मतलब सेहत के लिए पॉवर हाउस

Health tips: सहजन ‘सोने पर सुहागा’ वाले मुहावरे का जीवंत प्रमाण है। हरियाली के साथ यह पोषण भी देता है। यह पोषण सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, खेती और पशुओं के लिए भी मुफीद है। सहजन में फूल अमूमन तब आते हैं जब अन्य किसी फल या फूल में फूल नहीं रहते। ऐसे में इनके फूलों पर लगने वाली मधुमक्खियां परागण में भी मददगार होती हैं। परागण की खेतीबाड़ी में खासी अहमियत है। एक अनुमान के अनुसार परागण का वैश्विक फसल उत्पादन में लगभग 5 से 8 फीसद तक का योगदान होता है। यह लगभग 235 से 577 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर है। यही नहीं, सहजन के उपयोग से आप चाहे वर्मी कंपोस्ट बनाएं या मधुमक्खी पालन करें उसकी पोषण संबंधी खूबियां संबंधित उत्पाद में आकर उसके लाभ को कई गुना बढ़ा देती हैं।

पोषण के लिए क्यों जरूरी है सहजन

राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण 2019-2020 के मुताबिक देश के करीब 32 फीसद बच्चे अपनी उम्र के मानक वजन से कम (अंडरवेट) हैं। करीब 67 फीसद बच्चे ऐसे हैं जो अलग-अलग वजहों से एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं। अपनी खूबियों के नाते ऐसे बच्चों के अलावा किशोरियों, मां बनने वाली महिलाओं के लिए सहजन वरदान साबित हो सकता है। सहजन सिर्फ एक पेड़ एवं वनस्पति ही नहीं बल्कि अपनी पोषण एवं औषधीय खूबियों के कारण खुद में पॉवर हाउस जैसा है। इन्हीं खूबियों के नाते इसे चमत्कारिक वृक्ष भी कहते हैं।

सहजन कर सकता है 300 रोगों की रोकथाम

सहजन की पत्तियों एवं फलियों में 300 से अधिक रोगों की रोकथाम के गुण होते हैं। इनमें 92 तरह के विटामिन्स, 46 तरह के एंटी ऑक्सीडेंट, 36 तरह के दर्द निवारक और 18 तरह के एमिनो एसिड मिलते हैं।

तुलनात्मक रूप से सहजन के पौष्टिक गुण

विटामिन सी- संतरे से सात गुना।
विटामिन ए- गाजर से चार गुना।
कैल्शियम- दूध से चार गुना।
पोटैशियम- केले से तीन गुना।
प्रोटीन- दही से तीन गुना।

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