Lucknow News: यूपी पुलिस झूठों का झुंड, कानून के राज का खत्म हुआ भरोसा- राकेश वर्मा
Lucknow News: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता में पूर्व आईएएस अधिकारी राकेश वर्मा ने प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में पुलिस की जांच और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कानून के राज का आधार निष्पक्ष जांच और पुलिस पर जनता का भरोसा है।
राकेश वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत ने पुलिस अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराध, सत्ता और पुलिस व्यवस्था के बीच गठजोड़ के कारण दलित, पीड़ित, शोषित और वंचित वर्गों को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने FIR में आरोपी का नाम न होने पर उठाए सवाल
राकेश वर्मा ने 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का उल्लेख किया। यह मामला मोटरसाइकिल से जुड़े एक आपराधिक प्रकरण का था।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसने मौके पर आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था, लेकिन एफआईआर में आरोपी का नाम दर्ज नहीं किया गया।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब आरोपी को मौके पर पकड़ लिया गया था, तो एफआईआर में उसे अज्ञात क्यों बताया गया।
अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई से पुलिस पर लोगों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। पीठ ने जांच सीबीआई को सौंपने की संभावना का भी उल्लेख किया।
देवरिया मामले में CCTV फुटेज नहीं मिलने पर हाईकोर्ट सख्त
राकेश वर्मा ने देवरिया जिले के गौरी बाजार थाने से जुड़े मामले का भी जिक्र किया। इस मामले में चार लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें करीब 10 दिनों तक अवैध हिरासत में रखा गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस थाने की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने और कैमरे खराब होने के संबंध में अधिकारियों से सवाल किए।
अदालत ने राज्य सरकार को चार याचिकाकर्ताओं को कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही, यह राशि संबंधित थाना प्रभारी के वेतन से वसूलने का निर्देश भी दिया।
राकेश वर्मा ने इन दोनों मामलों का हवाला देते हुए प्रदेश सरकार से पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि कानून का राज केवल सरकारी दावों से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और आम जनता के भरोसे से साबित होता है।

