Gonda News: धोखाधड़ी के आरोपी पूर्व बसपा नेता को नहीं ढूंढ पा रही नवाबगंज पुलिस!
Sandesh Wahak Digital Desk/A.R.Usmani: धोखाधड़ी समेत कई गंभीर मामलों के आरोपी बसपा के पूर्व मंडल कोआर्डिनेटर राजिक उस्मानी को नवाबगंज पुलिस नहीं ढूंढ पा रही है। ऐसे में इलाकाई पुलिस की सक्रियता, कार्यशैली और उसके इकबाल पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अमूमन मामूली मामलों आम आदमी का जीना दुश्वार करने वाली ‘मित्र पुलिस’ को अब कटघरे में खड़ा किया जा रहा है, क्योंकि एफआईआर दर्ज किए चार माह बीत गए लेकिन पुलिस यारी निभा रही है।

नवाबगंज और वजीरगंज थाने में दर्ज हैं कई मुकदमें
जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव निवासी पूर्व बसपा नेता अब्दुल राजिक उस्मानी का विवादों से गहरा नाता रहा है। उनके खिलाफ नवाबगंज व वजीरगंज थाने में कई गंभीर धाराओं में मुकदमें दर्ज हैं। सपा सरकार के दौरान खाद्यान्न कालाबाजारी जैसे गंभीर आरोपों से घिरे लेकिन तिकड़म लगाकर बड़ी कार्रवाई से बच गए। राजिक उस्मानी पर तालाब की जमीन पर कब्जा कर मकान बनवाने के भी आरोप हैं, जिसमें बसपा शासनकाल में उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गयी थी।
हालांकि, उस समय वह बीएसपी में ही थे। तत्कालीन डीएम राम बहादुर ने अपने रसूख के बल पर तालाब की जमीन पर बनाए गए मकान को बुलडोजर लगाकर ध्वस्त करा दिया था। सूबे में सपा की सरकार बनी तो राजिक ने फिर सत्ता की छांव ढूंढ ली और एकक्षत्र राज किया। पावर, पैसा और रसूख के चलते राजिक उस्मानी द्वारा क्षेत्र में कई ऐसे काम किए गए जिससे सियासी शोहरत तो मिली, लेकिन सामाजिक ताने-बाने पर धब्बा लग गया।

वर्ष 2023 के मामले में नवाबगंज पुलिस ने रसूख के चलते नहीं दर्ज की थी एफआईआर
इस बीच वर्ष 2023 में एक मामला सामने आया, जिसमें राजनीतिक रसूख और पैसे के आगे एफआईआर नहीं दर्ज की गयी। वर्ष 2025 में 21 जनवरी को शाहपुर गांव निवासी पूर्व बसपा नेता अब्दुल राजिक उस्मानी के खिलाफ गांव के ही मोहम्मद मुजीब ने अदालत के आदेश पर नवाबगंज थाने में आईपीसी की धारा 406, 419, 420, 467, 468, 471, 504 व 506 के तहत मुकदमा दर्ज कराया। दर्ज कराए गये मुकदमे में मुजीब ने बताया कि उसने बसपा नेता अब्दुल राजिक उस्मानी के यहां वर्ष 2015 से तीन वर्ष तक दस हजार रूपए प्रतिमाह वेतन पर नौकरी की थी।

इसी दौरान बसपा नेता ने धोखाधड़ी एवं छल कपट पूर्वक नौकरी एवं जमीन के बदले जमीन देने का लालच देकर उसकी भूमि गाटा संख्या 259 को दान पात्र मदरसा मिसबाहुल उलूम के नाम पर 14 फरवरी 2016 में बैनामा करा दिया था। बसपा नेता ने उसे न तो जमीन दी और न ही नौकरी। मुजीब ने बताया कि बसपा नेता राजिक उस्मानी ने जालसाजी करते हुए हाथ से लिखे गए स्टेटमेंट बनाकर 32,90000 रुपये की मांग की और विश्वासघात करते हुए उसके वेतन का दो लाख रूपए भी गबन कर लिया।
पीड़ित को धमकाने का आरोप
25 सितंबर 2023 को जब पीड़ित मोहम्मद मुजीब ने जब बसपा नेता अब्दुल राजिक उस्मानी से जमीन के बदले जमीन और वेतन की मांग की तो बसपा नेता ने अपशब्दों का प्रयोग करते धमकी दी कि दोबारा दरवाजे पर आए तो गोली मार दूंगा। दरअसल, पूर्व बसपा नेता राजिक उस्मानी की इस दबंगई का एक सच यह भी है कि सूबे में जिस भी दल की सरकार रहती है, वह उसकी छांव ढूंढ लेते हैं।

बसपा के बाद प्रदेश में सपा के अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनी तो राजिक ने दिग्गज नेता पंडित सिंह की जी-हुजूरी की और अपने राजनीतिक रसूख को बरकरार रखा। बाद में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की छत्रछाया में शाहपुर और आसपास के इलाके में अपना एकाधिकार स्थापित करने का प्रयास किया, लेकिन विवादों से घिरते गए।

नेताजी की शरण में पूर्व बसपा नेता
सूत्र बताते हैं कि पूर्व बसपा नेता अब्दुल राजिक उस्मानी विधानसभा चुनाव से ही भाजपा के दिग्गज नेता पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की छत्रछाया में रह रहे हैं। यही वजह है कि धोखाधड़ी समेत आधा दर्जन से अधिक गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी नवाबगंज पुलिस उन पर हाथ नहीं डाल रही है।
क्या कहते हैं बसपा जिलाध्यक्ष
बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार कनौजिया का कहना है कि राजिक उस्मानी बीएसपी में नहीं हैं। न ही उनका बसपा कोई लेना-देना है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव 2022 के बाद से राजिक उस्मानी पार्टी की किसी भी मीटिंग या अन्य कार्यक्रमों में नहीं शामिल हुए हैं।
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