Health Tips: 25 के बाद हड्डियाँ होती हैं कमजोर, इन उपायों से रखें ख्याल

एक उम्र के बाद हड्डियों का कमजोर होना स्‍वाभाविक बात है। आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ 25 साल की उम्र तक ही हड्डियाँ मजबूत होती हैं।

Sandesh Wahak Digital Desk: एक उम्र के बाद हड्डियों का कमजोर होना स्‍वाभाविक बात है। आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ 25 साल की उम्र तक ही हड्डियाँ मजबूत होती हैं। 35 साल की उम्र के बाद हड्डियाँ कमजोर होने लगती हैं और उसके बाद ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हड्डियाँकमजोर होने पर कई तरह की दिक्‍कतों का सामना करना पड़ता है लेकिन हड्डियों को मजबूत करने के घरेलू उपायों की मदद से हर उम्र में स्‍वस्‍थ रह सकते हैं।

आज आपको कुछ ऐसी चीजें बताएँगे जिनका यदि हम सब ईमानदारी पूर्वक पालन करें तो हड्डी के तमाम प्रकार की कमजोरियों एवं विभिन्न प्रकार के रोगों से खुद को बचाया जा सकता है।

कार्बोनेटेड पेय पदार्थ मत पीएं

कार्बोनेटेड पेय पदार्थ जैसे कि सॉफ्ट ड्रिंक, शैंपेन आदि हड्डियों से कैल्शियम को खींच सकते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक 16 से 25 साल के नौजवानों को सॉफ्ट ड्रिंक के अधिक सेवन के कारण हड्डियों को क्षति पहुंचने की काफी संभावना हो सकती है। सॉफ्ट ड्रिंक्स में फास्‍फेट ज्‍यादा होता है जो कैल्शियम को कम करने लगता है इसलिए इन्हे पीना बिल्कुल ठीक नही।

ज्यादा मात्रा में न लें प्रोटीन

अधिक मात्रा में प्रोटीन लेने से काफी एसिडिटी हो सकती है जिसकी वजह से पेशाब के जरिए शरीर से कैल्शियम बाहर निकल सकता है। ज्‍यादा मात्रा में प्रोटीन लेना हड्डियों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। कुछ लोग रोजाना नॉनवेज, पनीर इत्यादि के बगैर मुंह में निवाला नहीं उठता है, वह कृपया सावधान हो जाएं।

एसिडिटी की दवाएं हो सकती हैं नुकसानदायक

कई लोग कई दिनों से सीने में जलन और हाइटस हर्निया (hiatus hernia) के लिए दवाओं का सेवन करते ही रहते हैं। कैल्शियम, मैग्‍नीशियम और जिंक जैसे खनिज पदार्थों के अवशोषण के लिए पेट में एसिड होना जरूरी होता है। अगर आप एसिड बनने से रोकने की, काफी दिनों से कोई दवा ले रहे हैं तो इससे आपमें ऑस्टियोपोरासिस का खतरा बढ़ जाता है। इन दवाओं को सिर्फ 6 से 8 हफ्तों तक ही लेना सुरक्षित रहता है।

कैफीन, अल्कोहल व धूम्रपान से दूर रहें

एक कप कॉफी पीने से अथवा एक सिगरेट पीने से या दिनभर मुंह में तंबाकू रखने से पेशाब के जरिए करीब 150 मि.ग्रा कैल्शियम शरीर से बाहर निकल जाता है। इनमें और भी कई हानिकारक रसायन होते हैं जो कि शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को बाहर निकालने में रुकावट पैदा कर सकते हैं फलस्वरूप ओस्टियोपोरोसिस होने से कोई आपको नहीं बचा सकता।

विटामिन डी लें

विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण और उन्‍हें हड्डियों तक पहुंचाने में मदद करता है। ये इम्‍यून सिस्‍टम के लिए भी बहुत जरूरी होता है। जब आप धूप लेते हैं तो स्किन के जरिए शरीर में विटामिन डी का निर्माण होता है, परंतु बहुत ज्यादा धूप लेना भी स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है। जो लोग धूप नहीं ले सकते हैं तो इसकी जगह विटामिन डी के सप्‍लीमेंट भी ले सकते हैं- जैसे दूध, अंडा, घर का छेना और तमाम प्रकार के फल इत्यादि।

हार्मोंस पर रखें नजर

महिलाओं में हड्डियों को नुकसान पहुंचने का सबसे आम कारण रजोनिवृत्ति है। वहीं 50 की उम्र पार कर चुके पुरुषों में हड्डियों को नुकसान होने का खतरा रहता है। हड्डियों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में एस्‍ट्रोजन, प्रोजेस्‍टेरोन और टेस्‍टेस्‍टेरोन जरूरी होता है। रजोनिवृत्ति में इन हार्मोंस में असंतुलन आ जाता है जो कि हड्डियों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अपने हारमोंस को सही प्रकार से रखने के लिए घर का बना खाना खाएं, बाहर का खाना कम ही खाए तो बेहतर है, थोड़े बहुत सूखे मेवे खाएं, घर में बना ताजा दही लें, दूध ले, सूखे मेवे ,अंजीर, अलसी तथा मौसमी ताजे फल इत्यादि लें। यदि फिर भी आपको कोई दिक्कत हो रही हो तो अपने चिकित्सक से अवश्य मिलें ।

तनाव से रहें दूर

स्‍ट्रेस यानी हमेशा तनाव में रहने से कोर्टिसोल हार्मोन का स्‍तर बढ़ता है। अगर लंबे समय तक इसका स्‍तर बढ़ा हुआ रहे तो हड्डियों को नुकसान पहुंच सकता है। इसकी वजह से ब्‍लड शुगर लेवल भी बढ़ सकता है और पेशाब के जरिए शरीर से कैल्शियम बाहर निकल सकता है। तनाव से दूर रहने के लिए ध्‍यान करें (meditation) और पर्याप्‍त नींद लें।

व्‍यायाम

योग व व्यायाम के दौरान जब मांसपेशियां हड्डियों के विपरीत खींचती हैं तो इससे हड्डियों में उत्तेजना पैदा होती है। पैदल चलने, साइकिलिंग करने, सीढियां चढ़ने और वेट लिफ्टिंग से हड्डियों के घनत्‍व में इजाफा होता है। दिनभर में 15 से 30 मिनट की एक्‍सरसाइज भी काफी होती है जिसको अपने उम्र के हिसाब से घटा बढ़ा सकते हैं।

इन सब उपायों को करने के बाद भी यदि आपको किसी भी प्रकार का हड्डी संबंधित कोई कष्ट होता है तो अपने चिकित्सक से तुरंत मिले और उनसे चिकित्सा करें।

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