हापुड़ में मीट कारोबारी और कर अधिवक्ता के ठिकानों पर दूसरे दिन भी IT रेड जारी, करोड़ों की टैक्स चोरी का अनुमान
Sandesh Wahak Digital Desk: हापुड़ जिले में मीट कारोबारी हाजी यासीन और हापुड़ टैक्स बार एसोसिएशन के सचिव कर अधिवक्ता नितिन गर्ग सहित चार प्रमुख ठिकानों पर आयकर विभाग (IT) की विशेष छापेमारी मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही। दिल्ली और लखनऊ से आई 50 से अधिक अधिकारियों की टीम ने दर्जनों फाइलें, बहीखाते, बैंक दस्तावेज और डिजिटल डेटा जब्त किया है। माना जा रहा है कि इस जांच में बड़े पैमाने पर आयकर चोरी के नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
इन ठिकानों पर हुई छापेमारी
आयकर विभाग की टीम ने सोमवार सुबह 9 बजे से इन प्रमुख ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की, जो मंगलवार को भी जारी रही।
- हाजी यासीन का प्रतिष्ठान (बुलंदशहर रोड व ईदगाह रोड)
- दाना कारोबारी असलम कुरैशी का आवास (आवास विकास कॉलोनी)
- कर अधिवक्ता नितिन गर्ग का आवास (श्रीनगर कॉलोनी)
- गौरव गर्ग का आवास (कृष्णा नगर)
कार्रवाई के दौरान, सभी ठिकानों को स्थानीय पुलिस की मदद से घेर लिया गया था। जांच टीम ने मोबाइल फोन जब्त कर लिए और किसी को भी अंदर-बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
हापुड़ में मीट कारोबारी और कर अधिवक्ता के ठिकानों पर दूसरे दिन भी IT रेड जारी
हापुड़ की यह छापेमारी केवल स्थानीय नहीं है, बल्कि एक राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसमें आयकर, जीएसटी, ईडी और सीबीआई की संयुक्त टीमों ने एक साथ कई जिलों में कार्रवाई की है।
- संभल: मीट कारोबारी हाजी रिजवान और इरफान के ठिकानों पर कार्रवाई।
- बरेली: शकील कुरैशी के ‘मार्या फ्रोजन’ स्लॉटर हाउस से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद।
- खुर्जा: मांस निर्यात करने वाली एक बड़ी यूनिट पर जांच जारी।
- गाजियाबाद: हाजी यासीन की फैक्ट्री पर भी तलाशी अभियान।
- इन सभी जिलों में 70 से अधिक वाहनों का काफिला छापेमारी में शामिल रहा।
जांच में मिले कैश ट्रांजेक्शन के रिकॉर्ड
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम को कुछ बहीखातों में करोड़ों रुपये के कैश ट्रांजेक्शन के रिकॉर्ड मिले हैं। इसके अलावा, कई डिजिटल डिवाइस और पेन ड्राइव भी जब्त किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। विभागीय सूत्रों का मानना है कि यह छापे उत्तर प्रदेश में मांस कारोबारियों पर अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाई हैं और इससे करोड़ों की कर चोरी का खुलासा हो सकता है।
आयकर विभाग अब जब्त किए गए बैंक खातों, लेनदेन के रिकॉर्ड और विदेशी व्यापार से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच करेगा। यदि मनी लॉन्ड्रिंग या कर हेराफेरी के सबूत मिलते हैं, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई आगे की जांच अपने स्तर पर शुरू कर सकती हैं।
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