डीएम से मुलाकात नहीं होने पर भड़के वकील, निंदा प्रस्ताव पारित कर न्यायालयों के बहिष्कार का किया ऐलान
Lucknow News: ऑनलाइन दाखिल-खारिज और धारा 34 की नई व्यवस्था को लेकर वकीलों और प्रशासन के बीच विवाद बढ़ गया है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे अधिवक्ताओं की जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन से मुलाकात नहीं हो सकी। इससे नाराज वकीलों ने कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी की और बाद में बैठक कर डीएम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया।
वकीलों ने प्रस्ताव मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को भेजने के साथ राजस्व न्यायालयों के बहिष्कार का फैसला लिया है। वहीं, डीएम ने वकीलों के आरोपों को गलत तरीके से पेश किया गया मामला बताते हुए कहा कि प्रशासन अधिवक्ताओं का सम्मान करता है और बातचीत के लिए तैयार है।
डीएम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव, शुक्रवार को भी न्यायिक कार्य स्थगित
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मुर्तजा हुसैन खान, कलेक्ट्रेट बार के कमलेश्वर सिंह और युवा बार के मृगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उतरौला और तुलसीपुर में चल रहे विरोध के समर्थन में मुख्यालय पर भी कामकाज ठप रखा गया था।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि जब वे जिलाधिकारी से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंचे तो डीएम उन्हें देखकर कार्यालय के पिछले दरवाजे से निकल गए। इस घटना के बाद वकीलों ने परिसर में नारेबाजी की। इसके बाद संघ भवन में बैठक हुई, जिसमें डीएम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर उसे मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को भेजने का निर्णय लिया गया।
महामंत्री संजय तिवारी और अशोक मिश्रा के अनुसार, शुक्रवार, 16 अक्टूबर को भी न्यायिक कार्य स्थगित रहेगा। इस दिन होने वाली आमसभा में आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।
दो वकील पांच साल के लिए निष्कासित
बैठक में संगठन विरोधी आचरण के आरोप में अधिवक्ता आशुतोष ओझा और आशीष सिंह को पांच साल के लिए निष्कासित करने का फैसला भी लिया गया।
वकीलों का विरोध ऑनलाइन दाखिल-खारिज और धारा 34 की नई व्यवस्था को लेकर है। इस मुद्दे पर प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच चल रहा विवाद अब कामकाज के बहिष्कार तक पहुंच गया है।
डीएम बोले, पहले से तय कार्यक्रम में शामिल होने निकला था
जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अधिवक्ताओं के आने की उन्हें पहले से कोई सूचना नहीं थी। वह दोपहर 12 बजे समेकित दिव्यांग विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकले थे, जहां बच्चों का कार्यक्रम पहले से तय था।
डीएम ने कहा कि ज्ञापन लेने से इनकार करने जैसी कोई बात नहीं थी और घटना को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन अधिवक्ताओं का सम्मान करता है और बातचीत के लिए तैयार है।
फिलहाल, ऑनलाइन दाखिल-खारिज और धारा 34 की नई व्यवस्था को लेकर विवाद जारी है। शुक्रवार को होने वाली आमसभा में वकीलों के अगले कदम पर फैसला होने की संभावना है।
Also Read: लखनऊ की अमीनाबाद दवा मंडी पर FSDA का बड़ा एक्शन, 14 मेडिकल फर्मों के लाइसेंस रद्द

