LDA में करोड़ों का फर्जीवाड़ा: फ्लैटों के नकली आवंटन पत्र जारी, जाली हस्ताक्षर का उपयोग, FIR दर्ज
Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में एक और बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। गोमती नगर विस्तार स्थित रिवर व्यू प्रोजेक्ट में अपर सचिव के जाली हस्ताक्षर कर करोड़ों रुपये कीमत के फ्लैटों के नकली आवंटन पत्र तैयार कर लिए गए। इस मामले में LDA के अवर अभियंता (JE) ने 5 नामजद और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ गोमती नगर थाने में FIR दर्ज कराई है, और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?
अलकनंदा अपार्टमेंट निवासी हर्षित गुप्ता ने 3 अक्टूबर को उच्चाधिकारियों को शिकायत भेजी। शिकायत में हर्षित ने बताया कि उसी अपार्टमेंट के निवासी पीयूष पाठक ने उन्हें वॉट्सऐप पर सतलज, यमुना और कावेरी अपार्टमेंट (रिवर व्यू) के फ्लैटों के आवंटन पत्र भेजे।
हर्षित द्वारा मूल प्रति मांगे जाने पर पीयूष पाठक ने इनकार कर दिया। प्राधिकरण ने जब जांच की तो पता चला कि ये सभी पत्र LDA के असली प्रारूप से पूरी तरह अलग हैं। इन पर अपर सचिव के जाली हस्ताक्षर किए गए हैं और किसी भी फ्लैट का नंबर अंकित नहीं था।
नामजद आरोपी और जांच का दायरा
LDA की जांच में पता चला कि फर्जी आवंटन पत्र जिन लोगों के नाम पर दिखाए गए हैं, उनमें हमीरपुर निवासी रवि कुमार कश्यप, हर्षित गुप्ता, वरुण कुमार साहू, और कानपुर निवासी रिम्पी सिंह शामिल हैं। पीयूष पाठक भी इस मामले में संलिप्त पाया गया है।
LDA ने पुलिस को दी गई शिकायत में स्पष्ट किया है कि फर्जी आवंटन पत्रों का पूरा मामला पीयूष पाठक और उपरोक्त व्यक्तियों से जुड़ा है। इन लोगों पर “कूटरचित हस्ताक्षर” के जरिए सरकारी दस्तावेजों में धोखाधड़ी करने का आरोप है।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला कुछ लोगों तक ही सीमित नहीं हो सकता है। संभावना है कि रिवर व्यू प्रोजेक्ट के कई अन्य फ्लैटों में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा किया गया हो। पुलिस जांच के बाद बड़ी साजिश का खुलासा होने की उम्मीद है।
प्राधिकरण ने साफ किया है कि रिवर व्यू प्रोजेक्ट से संबंधित कोई भी वैध आवंटन केवल LDA के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता द्वारा ही जारी किया जा सकता है।


