लखनऊ में पुलिसकर्मियों के पैरों में लेटे डॉक्टर, ACP ने हाथ जोड़कर की धरना खत्म करने की अपील
Lucknow Bonded Doctors Protest: लखनऊ में बॉन्डेड MBBS डॉक्टरों का समान वेतन की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। गुरुवार को प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने गले में स्टेथोस्कोप डालकर और मुंह पर टेप लगाकर विरोध जताया। इस दौरान कई डॉक्टर पुलिस के सामने हाथ जोड़ते और पैरों में लेटकर अपनी मांगें पूरी करने की गुहार लगाते दिखे। डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले 42 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
प्रदर्शनकारी 1090 चौराहे से कतार बनाकर सीएम आवास की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। सड़क पर बैठे डॉक्टरों को समझाने के लिए ACP भी जमीन पर बैठ गए। उन्होंने हाथ जोड़कर डॉक्टरों से धरना खत्म करने की अपील की। इस दौरान पुलिस और डॉक्टरों के बीच काफी देर तक बहस हुई।
‘One Bond One Salary’ के नारे, शासनादेश जारी नहीं होने से नाराजगी
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बॉन्डेड डॉक्टर शामिल हुए। उनके हाथों में ‘One Bond One Salary’ और ‘बॉन्डेड मेडिकल अधिकारियों को न्याय दो’ लिखी तख्तियां थीं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बिना अनुमति धरना देने और सड़क जाम करने का आरोप लगाया। वहीं, डॉक्टरों ने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, 2 सितंबर को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने उनकी मांगों पर सहमति जताते हुए समान वेतन लागू कराने का भरोसा दिया था। डॉक्टरों का दावा है कि उन्हें 24 घंटे के भीतर शासनादेश जारी करने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन अब तक आदेश जारी नहीं हुआ।
यह आंदोलन सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 2018, 2019 और 2020 बैच के बॉन्डेड MBBS डॉक्टर कर रहे हैं। उनका कहना है कि समान डिग्री, बॉन्ड और सेवा की शर्तें होने के बावजूद उन्हें अलग-अलग वेतन दिया जा रहा है। डॉक्टर समान वेतनमान लागू करने के साथ बकाया एरियर का भुगतान भी चाहते हैं।
‘300 किलोमीटर दूर से आते हैं, हर बार निराशा मिलती है’
प्रदर्शन में शामिल डॉक्टर अक्षय ने बताया कि वह मिर्जापुर से लखनऊ आए हैं। दूसरे जिले से आकर आंदोलन में शामिल होना उनके लिए काफी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि करीब 300 किलोमीटर का सफर तय करके आते हैं, लेकिन हर बार निराशा हाथ लगती है।
अक्षय ने डिप्टी सीएम के आश्वासन का जिक्र करते हुए कहा कि 24 घंटे में मांगें पूरी करने का वादा किया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “हम डॉक्टर हैं। हमें भगवान कहा जाता है, लेकिन वैसा सम्मान नहीं मिलता। अगर हमें सच में भगवान माना जाता, तो हमारे साथ ऐसा बर्ताव नहीं होता।”
देवरिया से आईं डॉक्टर निदा ने कहा कि डॉक्टर मजबूरी में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बॉन्ड सेवा के तहत डॉक्टरों को दो साल की अनिवार्य सेवा करनी होती है या 10 लाख रुपये के बॉन्ड की बाध्यता होती है। इस दौरान उन्हें ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात किया जाता है।
निदा के मुताबिक, इस सेवा के बदले डॉक्टरों को करीब 50 से 55 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। वहीं, प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का दावा है कि समान MBBS डिग्री, बॉन्ड, काउंसलिंग और चयन प्रक्रिया के तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बॉन्ड सेवा कर रहे कुछ डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन दिया जा रहा है।
डॉक्टर इसी अंतर को वेतन में असमानता बताते हुए समान वेतनमान और बकाया एरियर की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि 2 सितंबर को मिले आश्वासन के बावजूद शासनादेश जारी नहीं हुआ है। इसी वजह से 42 दिनों से जारी उनका आंदोलन अब तक खत्म नहीं हुआ है।
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