महेशपुर : शिक्षिका के जुनून और मेहनत ने बदल दी परिषदीय विद्यालय की तस्वीर

गोंडा जिले के नवाबगंज के प्राथमिक विद्यालय महेशपुर की प्रधानाध्यापिका वंदना पटेल बनीं नजीर

Sandesh Wahak Digital Desk/A.R.Usmani: प्राइमरी स्कूलों का नाम आते ही एक ऐसे परिसर की तस्वीर जेहन में आती है, जहां जर्जर भवन, टूटी-फूटी बाउंड्री वॉल और दीवारें होती हैं, लेकिन जिले में एक ऐसा परिषदीय विद्यालय है, जिसकी आभा किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं है। चमचमाते कमरे और स्मार्ट क्लास के साथ ही यहां प्रोजेक्टर के माध्यम से बच्चों के शिक्षण को रोचक व ज्ञानवर्धक बनाया जा रहा है। एक ही छत के नीचे ये सब मुमकिन हुआ है प्रधानाध्यापिका वंदना पटेल के जुनून और जज्बे से।

गोंडा जिले के शिक्षा क्षेत्र नवाबगंज के प्राथमिक विद्यालय महेशपुर की स्थिति काफी खराब थी। एडूलीडर्स अवार्ड- 2022 से सम्मानित प्रधानाध्यापिका श्रीमती वंदना पटेल ने विभाग के सहयोग एवं उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन में स्कूल की तस्वीर बदलने का काम शुरू किया। टूटी-फूटी बाउंड्री वॉल और फर्श को दुरूस्त कराने तथा विद्यालय भवन के रंग-रोगन के साथ ही गांव-गांव, घर-घर जाकर उन्होंने अभिभावकों को प्रेरित कर बच्चों का नामांकन कराया, जिससे आंकड़ा 200 के करीब पहुंच गया। बच्चों की संख्या बढ़ी तो उनके बैठने की जगह कम पड़ गयी।

विभाग के साथ ही स्वयं के रूपए खर्च कर वंदना ने बनवाया शिक्षण कक्ष

चार कमरों में कक्षा पांच तक के करीब 150 से अधिक बच्चों के शिक्षण में बाधा आने लगी, लेकिन जगह के अभाव में शिक्षण कक्ष की व्यवस्था नहीं की जा सकी। हालांकि, इससे बच्चों को पढ़ाने और बैठने में शिक्षकों को भी तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। प्रधानाध्यापिका श्रीमती वंदना पटेल ने स्कूल के बरामदे को न सिर्फ शिक्षण कक्ष का रूप दिया, बल्कि उसकी तस्वीर बदल दी। विद्यालय में अब पांच कमरे हो गये हैं, जिससे बच्चों को अलग-अलग कमरों में बैठाकर सुचारू रूप से शिक्षण कार्य किया जा रहा है। विद्यालय के सौंदर्यीकरण और शिक्षा के स्तर को सुधारने के प्रति वंदना पटेल के जुनून और मेहनत की हर कोई प्रशंसा कर रहा है।

वंदना पटेल

जहां चाह, वहां राह : वंदना पटेल

महेशपुर की प्रधानाध्यापिका वंदना पटेल कहती हैं कि जहां कुछ अलग करने की चाह होती है, वहां राह खुद-ब-खुद निकल आती है। वह बताती हैं कि स्कूल की तस्वीर बदलने की चाह उन्हें हमेशा रहती है। बच्चों को पूरी लगन और मेहनत से पढ़ाने के साथ ही उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पर्यावरणीय वातावरण मुहैया कराना भी वंदना पटेल का उद्देश्य रहा है। वह कहती हैं कि शिक्षण कक्ष के अभाव में बच्चों के बैठने और पढ़ने में दिक्कतें आ रही थीं, जिसको लेकर चिंता बनी रहती थी। आखिरकार समस्या के समाधान के लिए बरामदे के लुक को बदलकर उसे नये शिक्षण कक्ष का रूप दिया गया।

इस कार्य में बच्चों को मुहैया करा रहीं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं पर्यावरणीय वातावरण नवाबगंज शिक्षा क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय महेशपुर अलग मिसालें लिख रहा है। स्कूल की प्रधानाध्यापिका वंदना पटेल के जुनून ने इस विद्यालय की तस्वीर बदल दी है। वर्तमान में इस स्कूल का परिदृश्य किसी कॉन्वेंट स्कूल से कम नजर नहीं आता है। यहां शिक्षा ग्रहण करने के लिए आने वाले ग्रामीण बच्चों को बेहतर पर्यावरणीय माहौल मिल रहा है।

वंदना पटेल द्वारा विद्यालय परिसर में तमाम तरह के वृक्ष लगाए गए हैं, जिन्हें वह न सिर्फ खुद पानी देती हैं, बल्कि उनकी देखभाल भी करती हैं। यदि किसी कारणवश कोई पेड़ मुरझाने या सूखने लगता है तो वे ठीक उसी तरह चिंतित और परेशान हो जाती हैं, जैसे किसी मां की मनोदशा अपने बच्चों के बीमार होने पर होती है।

वंदना पटेल को एडूलीडर्स अवार्ड के साथ ही कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उनके जुनून और मेहनत के चलते प्राथमिक विद्यालय महेशपुर ने विकास के नए सोपान तय किए हैं। वर्तमान में विद्यालय में 150 से अधिक बच्चे अध्यनरत हैं, जिन्हें प्रधानाध्यापिका व एक शिक्षा मित्र समेत सात शिक्षकों द्वारा शिक्षा ग्रहण कराने का कार्य किया जा रहा है।

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