उन्नाव में शिक्षा सुधार की बड़ी पहल: 50 से कम छात्रों वाले 298 स्कूलों का होगा विलय
Sandesh Wahak Digital Desk: उन्नाव ज़िले के शुक्लागंज क्षेत्र में स्थित परिषदीय विद्यालयों में संसाधनों के बेहतर उपयोग और छात्रों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। शासन ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए उन विद्यालयों का युग्मन (मर्ज) करने का निर्णय लिया है, जहाँ छात्र संख्या 50 या उससे कम है। यह कार्यवाही शासनादेश संख्या 68-5099/328/2025-अनुभाग-5 (बेसिक शिक्षा)/994409/2025 के अंतर्गत दिनांक 16 जून 2025 को आरंभ की गई है।
बीएसए ने दिए निर्देश, 3 दिन में दें प्रस्ताव
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संगीता सिंह ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने विकासखंडों के अंतर्गत आने वाले ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार करें जहाँ छात्र संख्या 50 से कम है। इन विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण कर ग्राम शिक्षा समिति (SMC) की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें अभिभावकों को शासन की मंशा से अवगत कराया जाएगा।
चार ब्लॉकों के 298 विद्यालय युग्मन की प्रक्रिया में शामिल
बीएसए कार्यालय से जारी आँकड़ों के अनुसार चार प्रमुख विकासखंडों के कुल 298 विद्यालय इस नीति की ज़द में हैं:
बीघापुर विकासखंड:
- 95 प्राथमिक विद्यालय
- 15 उच्च प्राथमिक विद्यालय
- 3 कम्पोजिट विद्यालय
हसनगंज:
- 57 प्राथमिक विद्यालय
- 10 उच्च प्राथमिक विद्यालय
सिकंदरपुर सरोसी
- 59 प्राथमिक विद्यालय
- 7 उच्च प्राथमिक विद्यालय
सफीपुर
- 45 प्राथमिक विद्यालय
- 6 उच्च प्राथमिक विद्यालय
- 1 कम्पोजिट विद्यालय
शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों का कुशल उपयोग प्राथमिकता
बीएसए संगीता सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार की यह पहल उन विद्यालयों को पास के बेहतर संसाधनों वाले विद्यालयों से जोड़ने के उद्देश्य से की जा रही है, जहाँ नामांकन बहुत कम है। इससे शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यालय भवन, पुस्तकालय, लैब और अन्य सुविधाओं का समुचित उपयोग हो सकेगा और छात्रों को बेहतर शिक्षण माहौल मिलेगा।
खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे तीन दिनों के भीतर प्रस्ताव तैयार कर कार्यालय को सौंपें। प्रस्ताव में निम्न जानकारियाँ अनिवार्य रूप से शामिल होनी चाहिए।
- विद्यालय का नाम
- वर्तमान छात्र संख्या
- प्रस्तावित युग्म विद्यालय का विवरण
- दोनों विद्यालयों के बीच की दूरी
- सड़क की स्थिति
- संभावित छात्र संख्या वृद्धि
- ग्राम शिक्षा समिति की सहमति
गाँवों में जागरूकता ज़रूरी, भ्रम दूर करने में जुटा शिक्षा विभाग
शासन की इस नई नीति को लेकर ग्रामीण इलाकों में चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं। कुछ स्थानों पर अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति भी देखी जा रही है। इसे दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने जागरूकता अभियान शुरू किया है। SMC बैठकों में अधिकारी खुद भाग लेकर परिजनों को समझा रहे हैं कि यह निर्णय बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
भविष्य में दिखेगा असर
जिला प्रशासन का मानना है कि यह नीति शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ संसाधनों की बर्बादी को भी रोकने में मददगार साबित होगी। यदि यह प्रक्रिया सुव्यवस्थित रूप से पूरी होती है, तो आगामी समय में परिषदीय विद्यालयों में नामांकन दर में वृद्धि और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार निश्चित रूप से देखने को मिलेगा।
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