मेडिटेशन के बाद भी हो सकती हैं 7 परेशानियां, बेचैनी से लेकर नींद उड़ने तक के लक्षण

Meditation Side Effects: मेडिटेशन यानी ध्यान को आमतौर पर तनाव कम करने और मन को शांत रखने का तरीका माना जाता है। लेकिन हर व्यक्ति का अनुभव एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों को ध्यान लगाने के दौरान या उसके बाद बेचैनी, घबराहट और पुरानी घटनाओं से जुड़ी उदासी महसूस हो सकती है। कुछ लोगों को नींद आने में परेशानी भी होती है।

ध्यान के दौरान जब व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं पर गौर करता है, तो कई बार ऐसी बातें भी सामने आ सकती हैं, जिन्हें वह रोजमर्रा की व्यस्तता में नजरअंदाज करता रहा हो। ब्राउन यूनिवर्सिटी समेत कई संस्थानों में हुई रिसर्च में भी ध्यान से जुड़े ऐसे अनुभवों पर चर्चा की गई है। आइए जानते हैं मेडिटेशन के बाद होने वाली सात संभावित परेशानियों के बारे में।

  1. बेचैनी और घबराहट होना

मेडिटेशन के दौरान शांत बैठकर अपने विचारों पर ध्यान देने से कुछ लोगों की चिंताएं ज्यादा महसूस होने लगती हैं। ऐसे में घबराहट, बेचैनी या बार-बार उठने का मन हो सकता है। ऐसा होने पर खुद को जबरदस्ती शांत करने के बजाय कुछ देर ध्यान रोक दें और आराम से बैठें।

  1. चक्कर आना

कुछ लोग मेडिटेशन के दौरान अनजाने में बहुत गहरी या तेजी से सांस लेने लगते हैं। इससे शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बदल सकता है और चक्कर आने लग सकते हैं। इसलिए सांसों को जबरदस्ती तेज या गहरा न करें। स्वाभाविक तरीके से सांस लें। चक्कर आने पर तुरंत रुक जाएं।

  1. अचानक रोना या उदास महसूस करना

शांत बैठने के दौरान कभी-कभी पुरानी घटनाएं और उनसे जुड़ी भावनाएं याद आने लगती हैं। कुछ लोगों को दुख महसूस होता है, तो कुछ की आंखों से आंसू निकलने लगते हैं। ऐसा होने पर खुद को कमजोर न समझें। अगर उदासी लंबे समय तक बनी रहे, तो मदद लेने में संकोच न करें।

  1. आसपास की दुनिया से कटा हुआ महसूस करना

लंबे समय तक मेडिटेशन करने के बाद कुछ लोगों को आसपास की चीजें अजीब या सपने जैसी लग सकती हैं। ऐसा महसूस होने पर ध्यान बंद कर दें। अपने आसपास की चीजों को गौर से देखें, पैरों को जमीन पर टिकाएं और कुछ देर टहलें।

  1. रात में नींद न आना

मेडिटेशन से आमतौर पर आराम महसूस होता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके बाद ज्यादा सक्रियता महसूस हो सकती है। इससे रात में बिस्तर पर जाने के बाद भी नींद आने में परेशानी हो सकती है। अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो सोने से ठीक पहले मेडिटेशन करने से बचें।

  1. शरीर में दर्द और झनझनाहट

लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से कमर, गर्दन और कंधों में दर्द हो सकता है। हाथ-पैरों में झनझनाहट भी महसूस हो सकती है। शांत बैठने के दौरान शरीर में पहले से मौजूद खिंचाव ज्यादा महसूस हो सकता है। इसलिए बैठने की ऐसी स्थिति चुनें, जिसमें शरीर को आराम मिले।

  1. एंग्जायटी और डिप्रेशन बढ़ना

जिन लोगों को पहले से एंग्जायटी, डिप्रेशन या किसी दुखद घटना से जुड़ी परेशानी है, उन्हें कुछ तरह के मेडिटेशन से दिक्कत बढ़ने का अनुभव हो सकता है। पुरानी यादें और बेचैनी दोबारा उभर सकती हैं। ऐसे में खुद पर ध्यान लगाने का दबाव न डालें। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

मेडिटेशन करते समय इन बातों का रखें ध्यान

मेडिटेशन के बाद बेचैनी या दूसरी परेशानियां हर व्यक्ति को नहीं होतीं। हालांकि, अगर बार-बार ऐसा महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। शुरुआत में 5 से 10 मिनट तक ही मेडिटेशन करें और ऐसी जगह बैठें, जहां आप सहज महसूस करते हों।

घबराहट या चक्कर आने पर ध्यान रोक दें। अगर परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं, तो डॉक्टर से बात करें। याद रखें, मेडिटेशन का उद्देश्य बेहतर महसूस करना है, न कि खुद को परेशानी में डालना।

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