प्रो. अली खान मामले में SC के आदेश पर हरियाणा सरकार ने गठित की SIT
नई दिल्ली: विवादित सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुर्खियों में आए अशोका यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ हरियाणा सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार ने तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया है। यह जानकारी सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को दी।
जांच सीमित होगी सिर्फ दो पोस्ट तक: सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने हरियाणा सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच सिर्फ दो सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि प्रोफेसर के डिवाइस जब्त करने या अन्य पहलुओं की जांच की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि SIT की रिपोर्ट पहले सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाए और फिर जुलाई में अगली सुनवाई होगी।
हालांकि, कोर्ट ने अली खान महमूदाबाद की अंतरिम जमानत जारी रखी है। साथ ही, उन्हें सख्त हिदायत दी गई है कि वह “ऑपरेशन सिंदूर” और “पहलगाम हमले” जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अब कोई पोस्ट नहीं करेंगे।
कपिल सिब्बल ने उठाए जांच पर सवाल
प्रोफेसर की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि इस तरह की जांच से गलत संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि अली खान सिर्फ अपने विचार रख रहे थे, और इस पर इतना बड़ा कदम उठाना जरूरी नहीं है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने जवाब दिया कि अली खान को बोलने और लिखने की आजादी है, लेकिन वह उन मुद्दों पर दोबारा टिप्पणी नहीं कर सकते, जिन पर फिलहाल जांच चल रही है। सिब्बल ने जांच के दायरे में बदलाव की अपील की, लेकिन कोर्ट ने कहा कि अब जैसे चल रहा है, वैसे ही रहने दें, अगली सुनवाई में चर्चा करेंगे।
क्या है पूरा मामला
अली खान महमूदाबाद अशोका यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उन्होंने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट किया था, जिससे विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद 18 मई को उनकी गिरफ्तारी हुई और उन्हें 27 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई।
Also Read: POCSO केस में राहत के बाद बृजभूषण शरण सिंह का शक्ति प्रदर्शन, अयोध्या में भव्य स्वागत

