पतंजलि को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, च्यवनप्राश के विज्ञापन पर लगाई अंतरिम रोक

Sandesh Wahak Digital Desk: योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि को दिल्ली हाई कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने डाबर च्यवनप्राश के खिलाफ भ्रामक और अपमानजनक विज्ञापन प्रसारित करने के मामले में पतंजलि के च्यवनप्राश वाले विज्ञापन पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 14 जुलाई, 2025 को होगी।

क्या था पतंजलि का दावा और डाबर की आपत्ति

दरअसल, पतंजलि अपने विज्ञापनों में लगातार यह दावा कर रहा था कि उसके अलावा कोई भी अन्य कंपनी आयुर्वेद और शास्त्र सम्मत तरीके से च्यवनप्राश नहीं बनाती है। पतंजलि के इस दावे पर डाबर इंडिया ने कड़ी आपत्ति जताई और दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की। डाबर ने मांग की थी कि पतंजलि के इस भ्रामक विज्ञापन पर तुरंत रोक लगाई जाए और हर्जाने के तौर पर दो करोड़ रुपये का भुगतान किया जाए।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि के विज्ञापन पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसका मतलब है कि पतंजलि अब फिलहाल यह विज्ञापन प्रसारित नहीं कर पाएगा।

उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा था: डाबर के वकील

डाबर इंडिया के वकील एडवोकेट जवाहर लाल ने मीडिया से बात करते हुए बताया, डाबर की मुख्य चिंता यह थी कि पतंजलि अपने विज्ञापन में अन्य सभी च्यवनप्राश ब्रांडों का अपमान कर रहा था। अपने एक विज्ञापन में उन्होंने दावा किया, केवल हम ही शास्त्रों के अनुसार च्यवनप्राश बनाना जानते हैं, अन्य नहीं। इससे उपभोक्ताओं को अन्य आयुर्वेदिक उत्पादों के बारे में गुमराह किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने पतंजलि के विज्ञापन पर अंतरिम रोक लगाकर सही फैसला लिया है।

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