Siddharthnagar News: आलू किसानों को मिलेगा उन्नत बीज, 80 दिन में तैयार होगी फसल
उद्यान विभाग ने 95 क्विंटल बीज का लक्ष्य आवंटित किया, ऑनलाइन पंजीकरण के बाद पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होगा वितरण
Siddharthnagar News: सिद्धार्थनगर जिले के आलू किसानों के लिए अच्छी खबर है। आलू की खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उद्यान विभाग ने उन्नत किस्मों के बीज वितरण की तैयारी शुरू कर दी है।
निदेशालय स्तर से जिले के लिए कुल 95 क्विंटल आलू बीज का लक्ष्य आवंटित किया गया है।
विभाग के अनुसार, अनुकूल परिस्थितियों में आलू की फसल करीब 80 दिनों में तैयार हो सकती है और प्रति हेक्टेयर 250 से 300 क्विंटल तक उत्पादन मिलने की उम्मीद है।
जिला उद्यान अधिकारी विमल कान्त ने बताया कि जिले के लिए कुफरी सिन्दूरी के 15 क्विंटल, कुफरी बादशाह के 15 क्विंटल, कुफरी बहार के 15 क्विंटल और कुफरी संगम के 50 क्विंटल बीज का लक्ष्य तय किया गया है। निदेशालय के रोस्टर के अनुसार, जिले को जल्द ही बीज मिलने की संभावना है।
ऑनलाइन पंजीकरण के बाद मिलेगा बीज
जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों से आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के साथ विभाग की वेबसाइट www.potato.uphorticulture.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कराने की अपील की है।
आवेदन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत 25 प्रतिशत अग्रिम भुगतान करना होगा। विभाग के मुताबिक, अनुदान की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
जिले में करीब 1,500 से 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती होती है। बढ़नी, बांसी, इटवा, डुमरियागंज और भनवापुर प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्र हैं। बीज का वितरण निर्धारित नकद भुगतान प्रक्रिया के तहत ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा।
बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक खेती पर जोर
जिला उद्यान निरीक्षक संदीप कुमार वर्मा ने बताया कि आलू की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है।
खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाना चाहिए। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि एक एकड़ में खेती के लिए लगभग 12 से 14 क्विंटल रोगरहित और शुद्ध बीज की जरूरत होती है।
बीज का वजन कम से कम 30 ग्राम होना चाहिए। बेहतर पैदावार के लिए मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फेट और पोटाश का संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए।
उद्यान विभाग को उम्मीद है कि उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती की तकनीक और अनुदान की सुविधा से जिले में आलू उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।

