यूपी में स्मार्ट मीटर घोटाला, लाखों का चूना लगाने का आरोप, 4 पर FIR दर्ज
कंपनी पर पुराने मीटरों को नुकसान पहुंचाकर बिलिंग रोकने का आरोप
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों पर पॉवर कॉर्पोरेशन को लाखों रुपये का नुकसान पहुँचाने का गंभीर आरोप लगा है। ताज़ा मामला सीतापुर का है, जहां मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी और उसके चार अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है। आरोप है कि कंपनी के कर्मियों ने उपभोक्ताओं के पुराने मीटरों को जानबूझकर खराब कर दिया या उनकी रीडिंग शून्य कर दी, जिससे पुराने बकाया बिलों की वसूली रुक गई।
कैसे हुआ यह घोटाला?
पूरे प्रदेश में 2.73 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं, जिनमें से 34.05 लाख लग चुके हैं। मध्यांचल निगम में यह काम ‘पोलरिस स्मार्ट मीटर प्राइवेट लिमिटेड’ कर रही है। जाँच में पता चला है कि कंपनी ने पुराने मीटर वापस नहीं लौटाए हैं। जब जाँच की गई, तो पाया गया कि मीटरों के डिस्प्ले को लेजर या अन्य तरीकों से नष्ट कर दिया गया था, जबकि कुछ मीटरों की रीडिंग शून्य कर दी गई थी। इससे पुराने बिलों को लेना असंभव हो गया है और निगम को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। साथ ही, नए मीटरों की बिलिंग भी प्रभावित हो रही है।
इन अधिकारियों पर दर्ज हुआ केस
मध्यांचल निगम के अवर अभियंता समित कुमार ने सीतापुर में कंपनी के स्टेट क्लस्टर हेड राजेश यादव, जोनल प्रोजेक्ट मैनेजर अंकुर मिश्रा, जिला प्रबंधक रोशन प्रभात, और गोमती स्मार्ट मीटर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप है कि लगभग 443 पुराने मीटर उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे बिल जारी नहीं हो पा रहे हैं।
यह भी कहा जा रहा है कि गोंडा और बलरामपुर में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आई है, जहाँ मीटर डिस्प्ले टूटे हुए पाए गए हैं। बिजली उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस पूरे मामले को एक बड़ा घोटाला बताया है, जिसमें उपभोक्ताओं और कंपनी की मिलीभगत होने की आशंका है, ताकि पुराने बकाया बिलों को माफ़ किया जा सके।
Also Read: Shamli News: कैराना में 25 हज़ार का इनामी बदमाश इनाम उर्फ धुरी पुलिस मुठभेड़ में घायल, साथी फरार

