Thalassemia यानि रक्त में विकार घबराएं नहीं, अपने प्रतिरोधक क्षमता को रखें मजबूत

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के लिए और आनुवांशिक रोग थैलेसीमिया (Thalassemia) से जूझ रहे लोगों को हमेशा खतरा ज्यादा बना रहता है।

Sandesh Wahak Digital Desk: कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के लिए और आनुवांशिक रोग थैलेसीमिया (Thalassemia) से जूझ रहे लोगों को हमेशा खतरा ज्यादा बना रहता है। थैलेसीमिया खून से संबंधित एक बीमारी है जिसमें ऑक्सीजन वाहक प्रोटीन जिसे हेमोग्लोबिन कहते हैं और आरबीसी यानी रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिकाएं) शरीर में सामान्य से कम मात्रा में होते हैं। थैलेसीमिया मरीजों की इम्युनिटी सिस्टम भी ज्यादा कमजोर होती है इसलिए थैलेसीमिया के मरीजों का इस समय विशेष तौर पर खयाल रखना जरूरी है। थैलेसीमिया लाल रक्त कोशिकाओं में असामान्य हीमोग्लोबिन के उत्पादन की विशेषता आनुवंशिक विकारों का एक समूह है। इसे कभी-कभी मेडिटेरेनियन एनीमिया, वॉन जैक्सिच एनीमिया या कोलॉइसी एनीमिया कहा जाता है। थैलेसीमिया सभी जातियों को प्रभावित करता है।

Thalassemia के लक्षण

थैलेसीमिया से पीड़ित व्यक्तियों में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं होते हैं। परन्तु थैलेसीमिया के गंभीर रूपों में सामने आए लक्षण ये हैं —
सांस की तकलीफ ,अपच, पीलिया ,बढ़े हुए प्लीहा और यकृत के कारण उदर विकृत या फैला हुआ दिखाई देता है।एनीमिया के कारण पीली त्वचाहड्डियों का दर्दचेहरे की हड्डियों की असामान्य वृद्धि। बाल खराब विकास और छोटे कद को दर्शाता है।

कारण व प्रकार

थैलेसीमिया एक आनुवंशिक विकार है। यह दुनिया में सबसे आम, विरासत में मिला एक विकार है।

  1. अल्फा थैलेसिमिया
  2. बीटा थैलेसिमिया

नुक़सान

  • लाल रक्त कोशिका के संक्रमण से परिसंचारी रक्त में लोहे का अधिभार हो सकता है जो हृदय और जिगर को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • सेक्स हार्मोन का कम स्राव, मधुमेह, थायरॉयड ग्रंथियों की गतिविधि के तहत थैलेसीमिया से पीड़ित व्यक्ति भी इसके शिकार होते हैं।
  • ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपेनिया (हड्डी का घनत्व कम होना)।
  • लड़कियों में स्तन उभार की कमी और लड़कों में वृषण वृद्धि की अनुपस्थिति।
  • विलंबित यौवन विकास।
  • अनियमित मासिक, जिंक की कमी, मधुमेह।

Thalassemia और Homeopathy

जैसा कि आप सभी जानते हैं थैलेसीमिया (Thalassemia) एक अनुवांशिक बीमारी है और इसका कोई भी इलाज नहीं है। लेकिन होम्योपैथिक विधा में चिकित्सक लक्षणों के आधार पर बीमारी के मूल कारण का पता लगाकर उसी हिसाब से दवा प्रदान करते है। जिससे थैलेसीमिया से ग्रसित मरीजों के अंदर उत्पन्न अन्य उपसर्ग यानी बीमारियों में काफी आराम मिलता है। क्योंकि होम्योपैथिक दवाएं प्रतिरक्षा स्थिति को बेहतर बनाने में काफी मदद करती हैं जिससे तमाम बीमारियों से खुद को बचाने की शक्ति तीव्र होती है। होम्योपैथिक उपचार की भूमिका थैलेसीमिया के मामले में पूरक है।

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