गांधी के चरखे में छिपा है आत्मनिर्भरता का मंत्र: राजेश पांडेय
Barabanki News: गांधी भवन में शुक्रवार को चरखे की घरघराहट के बीच गांधी का स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संदेश जीवंत हो उठा। गांधी जयंती पर पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने चरखा चलाकर सूत काता। उन्होंने कहा कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की आज की चुनौती के दौर में गांधी का स्वदेशी विचार और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। गांधी के विचारों को केवल स्मरण करने के बजाय उन्हें नई पीढ़ी के जीवन से जोड़ना होगा। राजेश पांडेय ने कहा कि गांधी ने चरखे को महज कपड़ा कातने का साधन नहीं रहने दिया, बल्कि उसे विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक बनाया। चरखा एकाग्रता, श्रम और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाता है।

उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों से वह लगातार गांधी जयंती पर गांधी भवन आकर चरखे से सूत कात रहे हैं। इसकी प्रेरणा उन्हें अपने पिता के मित्र रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुरेश राम भाई से मिली। मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं सपा के राष्ट्रीय सचिव अरविंद कुमार सिंह गोप ने कहा कि गांधी को पढ़ना और समझना आसान नहीं है। उनके विचारों की कसौटी उनका कर्म था और उनका प्रत्येक विचार उस कसौटी पर खरा उतरता था। इससे पहले गोप ने गांधी भवन में ध्वजारोहण कर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने चरखा भी चलाया।

रामधुन से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत रामधुन से हुई। इसके बाद महात्मा गांधी स्पोर्ट्स क्लब के बच्चों ने गांधी भवन से पटेल तिराहा तक प्रभात फेरी निकाली। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज और महात्मा गांधी के चित्र लिए बच्चों ने देशभक्ति और गांधी के विचारों का संदेश दिया। समारोह की अध्यक्षता पूर्व विधायक सरवर अली खान ने की। गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट के संस्थापक राजनाथ शर्मा ने कहा कि डॉ. लोहिया का समाजवादी दर्शन गांधी के रामराज्य की अवधारणा से जुड़ा है। गांधी ने दुनिया भर के चिंतकों को प्रभावित किया।

गांधी के सपनों का भारत बनना अभी बाकी
गांधी के सपनों का भारत बनाने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है। समाजसेवी मो. उमैर किदवई ने कहा कि नई पीढ़ी गांधी के विचारों को उस गहराई से नहीं समझ पा रही है, जिसकी जरूरत है। संचालन पाटेश्वरी प्रसाद ने किया। इस मौके पर नागपुर से आए वरिष्ठ कांग्रेस नेता शिवशंकर शुक्ला, सलाहउद्दीन किदवई, अशोक शुक्ला, मृत्युंजय शर्मा, अंजुम बाराबंकवी, राम मनोरथ वर्मा, उमेश श्रीवास्तव, हुमायूं नईम खान, नीरज दूबे, विनोद भारती, विजयपाल गौतम, सभासद अश्वनी शर्मा, लोकतंत्र सेनानी कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष रामसेवक यादव, आरपी अवस्थी, रामकृष्ण राठौर, राम प्रकाश शर्मा (बदायूं), बनवारी लाल, वरिष्ठ अधिवक्ता फारूख अयूब, वीरेन्द्र प्रधान, तौकीर कर्रार, ज्ञान सिंह यादव, अजय वर्मा बबलू, हशमत अली सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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