UPMSCL: पहले लटकाया टेंडर, फिर खरीदी महंगी दरों पर करोड़ों की एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट
Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: गरीबों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आया बजट कमीशनखोरी में उड़ाने से अफसरों को गुरेज नहीं है। तभी मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन (यूपीएमएससीएल) में लगभग दुगुने दामों पर बिना टेंडर/ईओआई के करोड़ों की एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट की खरीद हो गई। यही दवा पीएम जन औषधि योजना और केजीएमयू समेत दिल्ली एम्स जैसे बड़े संस्थानों में बेहद सस्ते में खरीदी जा रही है।
कार्पोरेशन ने प्लानिंग के तहत पहले दवा की खरीद के वास्ते जारी टेंडर को जानबूझकर महीनों तक लटकाया। फिर मनमाने तरीके से रिस्क/आल्टरनेटिव परचेज के नाम पर करोड़ों की मंहगी खरीद अंजाम दे डाली। खुद को बचाने के खातिर कर्नाटक के सरकारी उपक्रम को खरीद का जिम्मा थमाया गया।

आकस्मिक खरीद के नाम पर कर्नाटक की कंपनी को दिया ठेका
कार्पोरेशन ने 8 मार्च 2024 को एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट समेत कई दवाओं का टेंडर नंबर 208 निकाला था। लेकिन एजिथ्रोमाइसिन की खरीद मुकाम तक नहीं पहुंची। जबकि उक्त टेंडर सितंबर-अक्टूबर में फाइनल हो चुका था। इसी दवा के लिए पुन: टेंडर नंबर 226 पिछले वर्ष 13 दिसंबर को आमंत्रित हुआ। जो 30 दिसंबर 2024 को खोला गया। इस टेंडर में टैबलेट की दरें कम आना तय थीं। नतीजतन एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट की आकस्मिक खरीद की कहानी तैयार हुई। इसके बाद केंद्र-कर्नाटक सरकार की संयुक्त कम्पनी कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स (केएपीएल) को एक करोड़ 55 लाख 63 हजार 300 एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट की खरीद का क्रयादेश(पीओ) 23 जनवरी 2025 को जारी हो गया।

केएपीएल द्वारा यूपी को एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट 12.0434 प्रति की दर से 18 करोड़ 74 लाख 35 हजार 47 रूपए में आपूर्ति की जायेगी। इससे पहले यूपीएमएससीएल अपने ही रेट कॉन्ट्रैक्ट(आरसी) से टेंडर नंबर 192 के जरिये एक अक्टूबर 2023 से 31 अक्टूबर 2024 तक इसी एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट(500 एमजी) को 6.7928 रूपए प्रति की दर से खरीद रहा था। खुले बाजार से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट(ईओआई) मंगाए जाते तो इस दवा को सस्ते में खरीद कर यूपी सरकार के करोड़ों रूपए बचाये भी जा सकते थे। इसी दवा एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट(500 एमजी) को लखनऊ के केजीएमयू में 6.50 रूपए प्रति की दर से खरीदा जा रहा है।

पीएम जन औषधि योजना में इसी दवा की सस्ती दरों पर हो रही आपूर्ति
वहीं प्रधानमंत्री जन औषधि योजना से जुड़े किसी भी मेडिकल स्टोर पर यही टैबलेट आठ रूपए साठ पैसे प्रति की एमआरपी पर आम जनता के लिए उपलब्ध है। तेलंगाना, राजस्थान, बिहार, तमिलनाडु, एमपी समेत बाकी राज्यों के मेडिकल कार्पोरेशन भी एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट को इसी तरह सस्ते में खरीद रहे हैं। दिल्ली एम्स में भी एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट की कीमत 7.50 रूपए प्रति निर्धारित है। इसके बावजूद कार्पोरेशन ने एजिथ्रोमाइसिन की खरीद मंहगी दरों पर करके करोड़ों के सरकारी बजट में बंदरबांट कर डाला। इस प्रकरण की गहराई से जांच में कार्पोरेशन के शीर्ष अफसरों से लेकर ड्रग सेक्शन के कई चर्चित चेहरों का बेनकाब होना तय है।

रक्षा मंत्रालय से प्रतिबंधित हुई थी कर्नाटक एंटीबायोटिक्स कंपनी
रक्षा मंत्रालय ने अधोमानक दवाएं मिलने पर पांच फरवरी 2024 को आदेश निकालकर कर्नाटक एंटीबायोटिक्स को दो साल के लिए डिबार(प्रतिबंधित) किया था। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने भी तीन दवाओं को अधोमानक पाया था। पिछले वर्ष भी केंद्र द्वारा 50 घटिया दवाओं पर जारी अलर्ट में कंपनी की पैरासिटामॉल दवा भी शामिल थी। कई राज्यों ने केएपीएल को पूर्व में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। इसके बावजूद यूपी सरकार ने कर्नाटक एंटीबायोटिक्स से महंगी दवाएं खरीद डाली।
रिस्क/आल्टरनेटिव परचेज में नियमों की धज्जियां उड़ीं
कार्पोरेशन में दवाओं के वास्ते बनाई गयी क्रय नीति की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जा रही हैं। ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी गरीबों के इलाज के बजट में अफसरों ने मनमाने तरीके से चहेती फार्मा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए रिस्क/आल्टरनेटिव परचेज के जरिये खरीदी दवाओं में खूब धांधलियां की हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान हुई खरीद की जांच में कई अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।
इस प्रकरण की पूरी जांच कराई जायेगी। दोषी कोई भी होगा। अनियमितताओं पर बख्शा नहीं जाएगा।
-ब्रजेश पाठक, उप मुख्यमंत्री
रिस्क/आलटर्नेटिव पर्चेज़ की अनुमति स्वास्थ्य विभाग ने दी या नहीं, इसका पता करना पड़ेगा।
-डॉ. रतन पाल सिंह, डीजी हेल्थ
एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट की खरीद सरकारी उपक्रम से हुई है। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है।
-जगदीश, एमडी (यूपीएमएससीएल)




