खबर का असर: श्रम विभाग के अफसरों को झटका, क्षेत्रीय दफ्तरों के डबल चार्ज का खेल खत्म

Sandesh Wahak Digital Desk: देर आये दुरुस्त आये की तर्ज पर आखिरकार यूपी के श्रम एवं सेवायोजन विभाग में मलाईदार सम्बद्धता का खेल ख़त्म हो गया। इससे सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित क्षेत्रीय दफ्तरों का अतिरिक्त प्रभार संभालने वाले रसूखदार अफसरों को तगड़ा झटका लगा है। ऐसे अफसर दो-दो साल से शासन की मेहरबानी के चलते अंगद के पैर के माफिक पूरी मजबूती के साथ जमे थे। जबकि कानपुर स्थित मुख्यालय में तमाम अफसर मानो खाली बैठे हैं।

‘संदेश वाहक’ के खुलासे के बाद शासन से स्थाई तैनाती का आदेश जारी

‘संदेश वाहक’ ने 30 मई को ‘श्रम विभाग : चहेतों को सैकड़ों किमी दूर क्षेत्रीय दफ्तरों का डबल चार्ज थमाने का खेल’ शीर्षक से प्रकाशित खबर के जरिये इसका खुलासा किया था। सैकड़ों किमी दूर अतिरिक्त प्रभार संभाले अफसरों को मानो आम जनता से कोई सरोकार ही नहीं रह गया था।

सबसे मजबूत विकेट अपर श्रमायुक्त मुख्यालय कानपुर सरजू राम शर्मा का हिला है। सरजू राम को शासन ने 7 अक्टूबर 2023 को उप श्रमायुक्त गौतमबुद्धनगर (नोएडा) जैसे जूनियर पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था। तकरीबन 450 किमी दूर दोहरे चार्ज के साथ ये अफसर कैसे न्याय कर रहे थे। यही बेहतर बता सकते हैं। सोमवार को विशेष सचिव श्रम नीलेश कुमार सिंह की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक सरजू राम की संबद्धता ख़त्म करते हुए आगरा के उप श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी को गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में इसी पद पर मूल तैनाती दी गयी है।

बेहद ताकतवर अफसर के तौर पर होती राकेश द्विवेदी की पहचान

राकेश द्विवेदी की पहचान भी श्रम विभाग में बेहद ताकतवर अफसर के तौर पर होती है। तभी इन्हे मूल तैनाती से 300 किमी दूर लखनऊ के अपर श्रमायुक्त पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। फिलहाल कई शिकायतों को दरकिनार करते हुए इन्हे शासन ने पुन: मलाईदार तैनाती से नवाजा है। सोमवार को शासन से जारी आदेश में आगरा में उप श्रमायुक्त के तौर पर अलीगढ़ में इसी पद पर तैनात सियाराम को भेजा गया है।

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जबकि अलीगढ़ में कानपुर मुख्यालय में तैनात नदीम अहमद को उप श्रमायुक्त के पद पर तैनाती मिली है। इन दोनों अफसरों के पास कोई अतिरिक्त प्रभार नहीं था। 26 मई को पिपरी सोनभद्र के उप श्रमायुक्त अरुण कुमार सिंह को आजमगढ़ में इसी पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। पिपरी से आजमगढ़ की दूरी तकरीबन 300 किमी है।

धर्मेंद्र सिंह को वाराणसी में अतिरिक्त प्रभार बरकरार

सोमवार को शासन ने इनका दोहरा प्रभार खत्म करते हुए मेरठ के उप श्रमायुक्त राजीव कुमार सिंह को आजमगढ़ में इसी पद पर नवीन तैनाती दे दी है। कानपुर मुख्यालय में तैनात उप श्रमायुक्त धर्मेंद्र सिंह को करीब 350 किमी दूर पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अपर श्रमायुक्त पद का अतिरिक्त प्रभार तकरीबन एक साल पहले दिया गया था। अगले माह इस अफसर का रिटायरमेंट है। इसलिए संभवत: शासन ने अभी धर्मेंद्र सिंह को वाराणसी में अतिरिक्त प्रभार पर बरकरार रखा हुआ है।

फिलहाल विभाग में सिर्फ सरजू राम शर्मा और कल्पना श्रीवास्तव ही अपर श्रमायुक्त स्तर के अफसर हैं। सूत्रों की माने तो सरजू राम को कैसे उपकृत किया जाए, इसके लिए शीर्ष स्तर पर माथापच्ची जारी है। ऐसे में अगर निकट भविष्य में उन्हें वाराणसी का अतिरिक्त प्रभार शासन सौंप दे तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। अतिरिक्त प्रभार सौंपने के मुद्दे पर श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने पूर्व में ‘संदेश वाहक’ से कहा था कि 15 जून तक ट्रासंफर होंगे। सब व्यवस्थित करा दिया जाएगा।

गृह जनपद वाले अयोध्या मंडल का दोहरा प्रभार भी हटाया

30 जून 2024 को सहायक श्रमायुक्त घनश्याम सिंह को वाराणसी की तैनाती पर उप श्रमायुक्त का प्रमोशन मिला था। 8 जुलाई 2024 को कानपुर में अतिरिक्त प्रभार मिला। इस वर्ष 4 मार्च को अयोध्या में इसी पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गयी। इस तैनाती ने नियमों की धज्जियां उड़ाई, क्योंकि घनश्याम का गृह जिला अम्बेडकरनगर है, जो अयोध्या मंडल का हिस्सा है। सोमवार को अयोध्या से संबद्धता खत्म करते हुए कानपुर में तैनाती मिली है। अयोध्या में अमित मिश्रा को स्थाई उप श्रमायुक्त बनाया गया है। यह कानपुर मुख्यालय/सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की दोहरी जिम्मेदारी पर थे।

लखनऊ की अपर श्रमायुक्त बनीं कल्पना श्रीवास्तव

लखनऊ में अपर श्रमायुक्त मधुर सिंह के निधन के बाद इसी वर्ष 4 मार्च को आगरा के श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी को सैकड़ों किमी दूर स्थित राजधानी का अतिरिक्त प्रभार शासन ने सौंपा था। सोमवार को शासन ने आदेश जारी करके लखनऊ में अपर श्रमायुक्त पद की स्थायी जिम्मेदारी कानपुर मुख्यालय में इसी पद पर तैनात कल्पना श्रीवास्तव को सौंपी है।

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