UP News: बढ़ी धनकुबेर आईआरएस की संख्या, संपत्तियों का ब्योरा बताने से परहेज

Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: 25 बैंक खाते, 3.5 किलो सोना-दो किलो चांदी, कई प्रदेशों, दुबई में सम्पत्तियां और एक करोड़ कैश, भ्रष्टाचार की इस नायाब कलंक कथा के असली हीरो हैं 2007 बैच के भारतीय राजस्व सेवा के वरिष्ठ अफसर अमित कुमार सिंघल।

IRS ऑफिसर अमित कुमार सिंघल और हर्ष कोटक को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करती CBI की टीम

जिनको एक दिन पहले सीबीआई ने आयकर विभाग में मामला सेटल कराने के बदले 45 लाख की घूसखोरी में दबोचा है। करदाता सेवा महानिदेशालय के एडीजी सिंघल ने इस तरह कई मामलों को सेटल करके करोड़ों की काली कमाई की होगी।

सबसे अहम तथ्य है कि देश में भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने के खातिर जिस केंद्रीय सतर्कता आयोग अर्थात सीवीसी की स्थापना हुई है। उसी सीवीसी के भीतर पूर्व में सिंघल जैसे भ्रष्ट आईआरएस को निदेशक जैसे संवेदनशील पद पर कैसे नियुक्त कर दिया गया था। खैर सिंघल जैसे धनकुबेर आईआरएस अफसरों की जमात और सम्पत्तियां बीते वर्षों में तेजी से बढ़ी है।

तभी भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के इन शीर्ष अफसरों को अपना अचल सम्पत्ति ब्यौरा (आईपीआर) सार्वजनिक करने से परहेज है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी), देश में इन्ही दोनों बोर्ड के बैनर तले पूरी आईआरएस लॉबी कार्यरत है।

IAS-IPS की तर्ज पर आईपीआर सार्वजनिक क्यों नहीं?

राजस्व सेवा के इन शीर्ष अफसरों के लिए सम्पत्ति का ब्यौरा दाखिल करना उतना ही जरुरी है, जितना आईएएस, आईपीएस और आईएफएस समेत किसी भी अखिल भारतीय सेवाओं से जुड़े अफसरों के लिए। हाल ही में पारदर्शिता के खातिर सुप्रीम कोर्ट ने अपने न्यायाधीशों का सम्पत्ति ब्योरा सार्वजनिक किया है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर राज्यों के सीएम तक सम्पत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करते हैं। उसके बावजूद सीबीडीटी की आधिकारिक वेबसाइट (https://irsofficersonline.gov.in/) पर आईआरएस के आईपीआर का कोई लिंक मौजूद नहीं है।

वहीं सीबीआईसी (अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क एंड कस्टम) के आईआरएस अफसरों के आईपीआर को सार्वजनिक करने के लिए डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट (https://dghrdcbic.gov.in/) की आधिकारिक वेबसाइट मौजूद है। लेकिन इसमें एचआरएम वन ऑप्शन के अंदर जाने पर आईपीआर स्टेटस का विकल्प आता तो जरूर है। लेकिन क्लिक करते ही वेबसाइट क्रैश होकर धड़ाम हो जाती है। कभी आईपीआर का दिया लिंक खुलता ही नहीं है। इसका सीधा अर्थ है कि सीबीआईसी की आईआरएस लॉबी ने सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे कहावत का सहारा बेहद चालाकी से लिया है।

जनता को जानने का अधिकार, नौकर के पास क्या-क्या है

एक वरिष्ठ आईआरएस अफसर का कहना है कि हम जनता के नौकर हैं, मालिक नहीं। जनता को जानने का पूरा अधिकार है कि नौकर के पास क्या-क्या है। सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए ऑफिसर्स को बोलने की आजादी देना जरुरी है। ब्रिटिश काल के कंडक्ट रूल्स को सिरे से बदला जाना चाहिए। तभी पीएम का भ्रष्टाचार के प्रति मिशन स्वच्छता पूरा हो सकेगा। अंग्रेजों ने दास को ध्यान में रखकर रूल्स बनाये थे। उन्हें प्रो सिटीजन बनाया जाना चाहिए।

कई आईआरएस गए जेल, अहम तैनाती बढ़ाती है हैसियत

यूपी में संसारचंद, अरविन्द मिश्रा, सतीश कुमार, सचिन बालासाहेब सावंत जैसे कई भ्रष्ट आईआरएस घूसखोरी में जेल जा चुके हैं। इनकी अकूत सम्पत्तियों की जांच गहराई से कभी हुई ही नहीं। देश में बीबी राजेंद्र प्रसाद, संतोष करनानी, जीवनलाल लाविडिया, एमके कृष्णास्वामी जैसे भ्रष्ट आईआरएस की लम्बी फेहरिस्त है। पिछले साल सीबीआई की छापेमारी में दो आईआरएस की 40 करोड़ की सम्पत्तियां मिली थीं। यूपी में हाल ही में रिटायर बेहद कद्दावर वरिष्ठ आईआरएस का देहरादून में करोड़ों का होटल बेहद चर्चा में है।

भ्रष्ट आईआरएस पर सुप्रीम कोर्ट का तल्ख अंदाज

कुछ वर्ष पहले महाभ्रष्ट आईआरएस संतोष करनानी को गुजरात हाईकोर्ट की ओर से मिली अग्रिम जमानत को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भ्रष्टाचार समाज के लिए गंभीर खतरा है और इससे सख्ती से निपटना चाहिए। भ्रष्टाचार न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाता है, बल्कि सुशासन को भी प्रभावित करता है। पीठ ने कहा, यह ठीक ही कहा गया है कि भ्रष्टाचार एक ऐसा पेड़ है, जिसकी शाखाएं हर जगह फैल जाती हैं। इससे सतर्क रहने की जरूरत है।

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