UP Police: खाकी के इस्तकबाल को धता बताकर कोर्ट में सरेंडर कर रहे अपराधी
उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ एसटीएफ को भी लंबे समय तक छका रहे दर्जनों मुकदमों में फंसे माफिया
Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: यूपी पुलिस के खौफ से अपराधी खुद थाने पहुंच जाते हैं। आये दिन हो रहे एनकाउंटर भी अपराधियों में दहशत फैलाने के लिए काफी हैं।

इन दावों के बीच सिक्के का दूसरा पहलू ये भी है कि शातिर अपराधियों और माफियाओं ने यूपी पुलिस के साथ तेजतर्रार एजेंसी एसटीएफ को भी चकमा देने में मानो महारथ हासिल कर ली है। तमाम मुकदमों के बावजूद न सिर्फ ऐसे नामी अपराधी आराम से खाकी को धता बताकर कोर्ट में सरेंडर कर रहे हैं बल्कि इस फेहरिस्त में सामान्य डॉक्टर तक शामिल होने से कई गंभीर सवाल भी खड़े होते हैं।

सुधीर सिंह जैसे कई माफियाओं को पकडऩे में पुलिस रही नाकाम
इन मामलों में पुलिस के किसी अफसर की जवाबदेही और जिम्मेदारी तक तय नहीं हो रही है। सीएम योगी के जिले गोरखपुर का हाल तो और भी बदहाल है। एक दिन पहले ही गोरखपुर के टॉप टेन माफियाओं में शुमार सुधीर सिंह ने लखनऊ कोर्ट में पुलिस के सारे दावों की हवा निकालते हुए व्यापारी पर जानलेवा हमले के आरोप में सरेंडर कर दिया है। इस माफिया को खोजने में जिला पुलिस, क्राइम ब्रांच के साथ एसटीएफ भी जुटी थी। सुधीर का नाम प्रदेश के चिन्हित 68 माफियाओं की सूची में दर्ज है।

खुद सीएम योगी ने इसके खिलाफ सख्ती दिखाते हुए 200 करोड़ से ज्यादा की सम्पत्ति भी पूर्व में जब्त कराई थी। ताकतवर अपराधियों का पुलिस को चकमा देने का ये पहला मामला नहीं है। छह जून को यूपी पुलिस के इस्तकबाल को तब गहरा आघात पहुंचा, जब अपराध और राजनीति की दुनिया में दशकों से चर्चित नाम 25 हजार के इनामी रमेश सिंह उर्फ काका ने मऊ की कोर्ट में सरेंडर किया।
अपराध और राजनीति के कई चर्चित नाम फेहरिस्त में शामिल
प्रदेश स्तर पर चिन्हित माफिया, समाजवादी पार्टी का पूर्व ब्लॉक प्रमुख और गैंग आईआर-212 का सरगना रमेश सिंह काका बीते कई दिनों से फरार था। रमेश के खिलाफ गैंगस्टर, हत्या, अपहरण, रंगदारी, धोखाधड़ी जैसे 67 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। दो दिन पहले आजमगढ़ में प्रॉपर्टी डीलर अश्विनी चौहान की हत्या के मुख्य आरोपित एक लाख के इनामी मैकू यादव उर्फ रामचंद्र यादव ने एसटीएफ और पुलिस की चार टीमों को चकमा देकर मऊ की कोर्ट में सरेंडर कर दिया। एसटीएफ और पुलिस की टीम हाथ मलते रह गई।

तीन दिन पहले बागपत में कचहरी से भागे 50 हजार के इनामी हिस्ट्रीशीटर गौतम ने कोर्ट में सरेंडर किया। जिससे पुलिस की फजीहत हुई। इसी तरह अगस्त 2024 में सुल्तानपुर जिले में सराफा व्यवसायी की दुकान पर हुई डकैती के मामले का आरोपी विपिन सिंह भी पुलिस को चकमा देकर गैंगेस्टर कोर्ट में सरेंडर कर चुका है। अक्टूबर 2024 में कुशीनगर जिले में जुए के कारोबार के मुख्य आरोपी संजय पटेल ने भी जिला सत्र न्यायालय में सरेंडर किया था। इस मामले में कप्तानगंज थानाध्यक्ष के साथ एक एसआई और दो सिपाहियों को लापरवाही पर सस्पेंड किया गया।

डॉक्टर अनुष्का तिवारी ने कोर्ट में किया था सरेंडर
महोबा के पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार ने तो करीब दो वर्ष तक फरारी काटने के बाद 15 अक्टूबर 2022 को लखनऊ में सरेंडर किया था। सिर्फ माफिया ही नहीं बल्कि आम आदमी भी पुलिस की सक्रियता को चकमा देने में कामयाब होता नजर आ रहा है।

ऐसा मामला कानपुर के बेहद चर्चित हेयर ट्रासंप्लांट से दो इंजीनियरों की मौत के मामले में नजर आया था। जहां आरोपी डॉक्टर अनुष्का तिवारी भी पुलिस से बचते हुए कोर्ट में सरेंडर करने में कामयाब हो गयी। इसी अंदाज में दिसंबर 2022 में लखनऊ के कैंट थाना क्षेत्र में हुए बिहार के मोस्टवांटेड अपराधी वीरेन्द्र उर्फ गोरख ठाकुर हत्याकांड का मुख्य आरोपी फिरदौस भी पुलिस की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब हो गया था।

फिरदौस की तलाश में यूपी और बिहार की पुलिस कई दिनों से लगी थी। इसके बावजूद वो लखनऊ की कोर्ट में सरेंडर करने में कामयाब हो गया। फिरदौस ने लखनऊ में अपने खिलाफ दर्ज शस्त्र अधिनियम के एक मुकदमे में पुलिस को चकमा देते हुए कोर्ट में सरेंडर किया था। जिससे पुलिस की खूब फजीहत भी हुई। अगला नाम माफिया व पूर्व विधायक धनंजय सिंह का है। मार्च 2021 में तब 25 हजार के इनामी धनंजय ने वकील बनकर प्रयागराज कोर्ट में सरेंडर करके पुलिस के दावों की पोल खोल दी थी। पूर्व विधायक अब्बास अंसारी जैसे तमाम रसूखदार तो काफी पहले से कोर्ट में पुलिस को ठेंगा दिखाते हुए सरेंडर करते रहे हैं।

सीएम के गोरखपुर में बड़े माफियाओं को पकड़ने में सबसे ज्यादा छूट रहा पसीना
यूपी पुलिस मानो सीएम योगी के जिले गोरखपुर के शातिर अपराधियों को पकडऩे में कुछ ज्यादा ही लापरवाह है। चर्चित माफिया सुधीर सिंह के अलावा कई ऐसे बड़े अपराधी हैं। जिन्होंने यहां पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में आराम से सरेंडर किया है। फरवरी में गोरखपुर में हुए अभिषेक सिंह उर्फ चंचल हत्याकांड के मुख्य आरोपी गैंगस्टर मानवेंद्र सिंह ने पुलिस को चकमा देकर देवरिया के सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।

मानवेंद्र को पकड़ने के लिए गोरखपुर के बेलघाट थाना पुलिस, क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की टीमें दिन-रात काम कर रही थीं। मानवेंद्र ने देवरिया कोतवाली थाने में 2019 में दर्ज एक आर्म्स एक्ट के मुकदमे में अपनी जमानत वापस कराकर सरेंडर किया। वहीं मई 2023 में 33 मुकदमें झेल रहे माफिया अजीत शाही ने भी कोर्ट में सरेंडर किया था। माफिया की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपए का इनाम घोषित हुआ था।
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