UP State Medical Faculty: शासन के निर्णय से यूपी के नर्सिंग शिक्षा माफियाओं की राह आसान

इस वर्ष जीएनएम की 5082 खाली सीटों को भरने के लिए निजी कॉलेजों को भी खुद से प्रवेश लेने का दिया विकल्प

Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: मिशन निरामया के जरिये प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने का बीड़ा खुद सीएम योगी ने उठाया था। जिसका परिणाम केंद्रीयकृत प्रवेश परीक्षा है।

इसके बावजूद नर्सिंग शिक्षा माफियाओं का सिंडिकेट नहीं टूटा। पिछले वर्ष की तर्ज पर एक बार फिर खाली सीटों को भरने की दुहाई के तौर पर परदे के पीछे से शासन के अफसरों ने निजी नर्सिंग कॉलेजों के लिए खुद प्रवेश परीक्षा के जरिये दाखिला कराने का रास्ता विकल्प के तौर पर खोल दिया है। जिसके जरिये नर्सिंग शिक्षा माफिया अयोग्य अभ्यर्थियों को मनमाने तरीके से कॉलेजों में दाखिला दिलवाकर करोड़ों की कमाई कर सकते हैं।

हाईकोर्ट के आदेश पर हापुड़ के निजी कॉलेज का प्रत्यावेदन निस्तारित

जिन अभ्यर्थियों ने अटल विवि द्वारा कराई केंद्रीयकृत प्रवेश परीक्षा के जरिये खुद को नर्सिंग शिक्षा के लिए योग्य साबित कर दाखिला लिया है। वे खुद को ठगा महसूस कर सकते हैं। वहीं जिन नए कॉलेजों की इसी वर्ष संबद्धता यूपी मेडिकल फैकल्टी से हुई है। उनकी भी बांछें शासन द्वारा गुरुवार को दिए निर्णय से खुल गयी हैं। पिलखुआ हापुड़ के जीएस स्कूल ऑफ नर्सिंग के प्रधानाचार्य ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर करके जीएनएम पाठ्यक्रम की रिक्त 50 सीटों को भरे जाने की गुहार लगाई थी।

इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शासन को दो दिनों के भीतर प्रदेश के कॉलेजों में जीएनएम(नर्सिंग) की खाली सीटों को भरने के संबंध में दिए प्रत्यावेदन को निस्तारित करने का आदेश दिया था। जिसके क्रम में शासन के चिकित्सा शिक्षा अनुभाग चार ने 30 अक्टूबर को अपर मुख्य सचिव अमित घोष की ओर से अटल बिहारी बाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के लिए दिशा निर्देश के तौर पर आदेश जारी किया है।

इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी से जुड़े राजकीय और निजी नर्सिंग संस्थानों की जीएनएम पाठ्यक्रमों को भरे जाने के लिए 20648 सीटों पर 38376 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। 11 जून को हुई प्रवेश परीक्षा में 35604 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। प्रवेश प्रक्रिया का जिम्मा अटल बिहारी बाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के पास था।

अटल यूनिवर्सिटी को तीन विकल्प शासन ने सुझाये

अटल यूनिवर्सिटी ने 17 जून से 23 सितंबर के बीच कुल पांच राउंड काउंसिलिंग कराई। जिसके जरिये 15566 सीटों पर अभ्यर्थियों को प्रवेश मिला। इसके बावजूद 5082 सीटें खाली रह गयीं। ऐसे में खाली सीटों को भरने के लिए अटल यूनिवर्सिटी को तीन विकल्प शासन ने सुझाये हैं। जिसमें सबसे पहला जीएनएम की रिक्त सीटों के लिए एक अतिरिक्त स्ट्रे राउंड काउंसिलिंग के आयोजन का है। जिसमें पूर्व आयोजित जीएनएम प्रवेश परीक्षा के शेष अभ्यर्थी भी शामिल हो सकेंगे। वहीं दूसरे बिंदु के तौर पर सीएनईटी 2025(बीएससी नर्सिंग प्रवेश परीक्षा) के अभ्यर्थियों को जीएनएम पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग में भाग लेने की अनुमति दी गयी है।

तीसरे बिंदु में शासन ने लिखा है कि काउंसिलिंग के बाद भी सीटें रिक्त होने की दशा में संस्थाओं (निजी कॉलेज) द्वारा स्वस्तर से प्रवेश परीक्षा के जरिये रिक्त सीटों को भरे जाने की कार्यवाही की जायेगी। अपर मुख्य सचिव के आदेश का यही बिंदु नर्सिंग शिक्षा माफियाओं के लिए सोने पर सुहागा साबित होगा क्योंकि उनकी असली मंशा यही थी। पारदर्शी तरीके से अगर अटल विवि ही एक और प्रवेश परीक्षा खाली सीटों के संबंध में आयोजित कर लेता तो योग्य अभ्यर्थियों को आने का मौका मिल जाता। आईएमसी ने वैसे भी 30 नवंबर तक प्रवेश पूरे करने की मियाद तय कर रखी है। एक माह में एक और प्रवेश परीक्षा आराम से आयोजित हो सकती थी।

नर्सिंग शिक्षा में आने वाले अभ्यर्थियों की गुणवत्ता पर सवाल

वहीं पिछली प्रवेश परीक्षा में जो अभ्यर्थी आवेदन करने से ही छूट गए थे। उनकी भी बांछें खिल जातीं। लेकिन ऐसा न करके शासन ने सीधे निजी कॉलेजों को अपने स्तर से दाखिलों की पूरी छूट दे डाली। पांच काउंसिलिंग में जब अभ्यर्थी इन कॉलेजों में प्रवेश के लिए आगे नहीं आये तो पुन: एक राउंड में कैसे आएंगे। ये तो अफसर ही जानें। निजी कॉलेजों को उनकी प्रवेश परीक्षा से सीटें खुद भरने का विकल्प देने से नर्सिंग शिक्षा में आने वाले अभ्यर्थियों की गुणवत्ता पर सवाल जरूर खड़े होने तय हैं। हालांकि शासन के बड़े अफसर इससे कतई इत्तेफाक नहीं रखते।

निर्णय सोच समझकर लिया गया: अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा शिक्षा)

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा अमित घोष ने कहा कि प्रत्यावेदन पर निर्णय बेहद सोच समझकर लिया गया है। खाली सीटों को भरने से जुड़े पहले दो विकल्पों में निजी कॉलेजों का हस्तक्षेप नहीं है। जो बच्चे प्रवेश परीक्षा दे चुके हैं उन्हें मौ$का मिलेगा। बीएससी नर्सिंग प्रवेश परीक्षा के 19 हजार अभ्यर्थी, जिन्हे प्रवेश नहीं मिला, जीएनएम में दाखिला ले सकते हैं। निजी कॉलेजों द्वारा खाली सीटों को भरने का विकल्प अंतिम है।

पिछले वर्ष भी रंग लाया था दबाव, स्थगित हुई थी केंद्रीयकृत प्रवेश परीक्षा

नर्सिंग शिक्षा माफियाओं का तंत्र मजबूत है। पिछले वर्ष भी पहले शासन ने जीएनएम में दाखिले के लिए अटल विवि को नोडल बनाते हुए केंद्रीयकृत प्रवेश परीक्षा को हरी झंडी दिखाई। विज्ञापन भी जारी हो गया। बाद में शासन ने पूरी प्रक्रिया स्थगित करके अगले वर्ष से प्रवेश परीक्षा कराने का आदेश जारी किया। इस वर्ष प्रवेश परीक्षा अटल विवि ने कराई है। 

 

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