‘क्यों बार-बार ठगे जा रहे हो मियां’, आकाश आनंद की वापसी पर चंद्रशेखर आजाद ने कही ये बात
Sandesh Wahak Digital Desk: आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के बैनर तले रविवार को राजधानी लखनऊ में एक अहम प्रबुद्ध जन सम्मेलन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केजीएमयू के पास स्थित अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में हुआ, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने लोगों को संबोधित किया।
अपने भाषण की शुरुआत में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा, पिछले 10 सालों में स्कूलों में रामायण और वेदों की कार्यशालाएं शुरू कर दी गईं। क्या शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक प्रचार-प्रसार सही है? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी पर भी कटाक्ष किया जिसमें वे विदेश में कहते हैं कि ‘हमें युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए।’ चंद्रशेखर बोले ये बातें सुनने में अच्छी लगती हैं, मगर जमीन पर सच्चाई कुछ और है।
वक्फ संशोधन कानून पर विरोध और मुस्लिम समाज का साथ
चंद्रशेखर ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन कानून का तीखा विरोध करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने संसद में इस कानून के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। उन्होंने कहा आज मुस्लिम समाज निशाने पर है, कल जैन, क्रिश्चियन और दूसरे अल्पसंख्यक समाजों का नंबर आएगा। इसलिए समय रहते एकजुट होकर बोलना और लड़ना सीखो।
बसपा में आकाश आनंद की वापसी पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर ने कहा जनता उन्हें पहले ही नकार चुकी है, मजबूरी में उन्हें दोबारा वापस लिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती का सम्मान करते हैं, लेकिन अब कांशीराम और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अधूरे मिशन को उनकी पार्टी ही पूरा करेगी। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि लड़ाई लंबी है, हमको लड़ना सीखना होगा। क्यों बार-बार ठगे जा रहे हो मियां? कह रहा हूं बार-बार मत ठगे जाओ मुस्लिम भाईयों, मेरे साथ आ जाओ।
2027 चुनाव की तैयारी का एलान
सम्मेलन में उन्होंने कार्यकर्ताओं को 2027 के चुनाव की तैयारियों में जुटने का आह्वान किया। चंद्रशेखर ने कहा अगर संगठन मजबूत नहीं हुआ, तो हमारी पहचान मिट जाएगी। राज बदलने के लिए न तलवार चाहिए, न बंदूक सिर्फ आपका वोट चाहिए। उन्होंने चेताया कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे, तो अगले 10 साल में बहुजन समाज से कोई सरकारी नौकरी में नहीं दिखेगा। न्याय मांगोगे तो जूते पड़ेंगे। पुलिस कस्टडी में रोज़ मौतें हो रही हैं। हम पुलिस का सम्मान करते हैं, मगर उत्पीड़न कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
हाथी और महावत की कहानी से किया जागरूक
अपने संबोधन में चंद्रशेखर ने बहुजन समाज की मानसिक गुलामी और राजनीतिक निष्क्रियता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा हमारे समाज का हाल उस हाथी जैसा है, जो अपनी ताकत भूल चुका है। 8 घंटे मजदूरी कर लेता है, मगर 2 घंटे समाज के लिए खड़ा नहीं हो सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा आज बहुजन समाज टूटी छतों के नीचे जी रहा है, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और इलाज से वंचित है, लेकिन उसे यह समझ ही नहीं आ रहा कि वह इन बेड़ियों को तोड़ भी सकता है।
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